इंदौर में NEET के लिए लेट हो रही छात्रा की पुलिस बनी मददगार; एडिशनल DCP ने सेंटर तक अपनी गाड़ी से पहुंचाया

Indore Police Help Student: इंदौर NEET Re-Exam में दिखा प्रशासन का मानवीय चेहरा, कलेक्टर शिवम वर्मा ने 3 मिनट में कराया छात्रा का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, ACP ने गाड़ी से पहुंचाया सेंटर।
Additional DCP helped a late NEET aspirant reach her examination center on time in Indore
नीट री-एग्जाम इंदौर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

NEET Re-Exam Indore:  इंदौर में आयोजित नीट यूजी री-एग्जाम के दौरान पुलिस और प्रशासन का संवेदनशील और मानवीय चेहरा देखने को मिला। परीक्षा के दिन कई ऐसे मामले सामने आए, जहां अधिकारियों की तत्परता और सूझबूझ ने छात्रों का भविष्य खराब होने से बचा लिया।

किसी छात्र को सही परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया गया तो किसी की दस्तावेज संबंधी समस्या का तत्काल समाधान किया गया। इन घटनाओं की अब पूरे शहर में चर्चा हो रही है और लोग प्रशासन की सराहना कर रहे हैं।

गलत सेंटर पहुंची छात्रा की एसीपी ने की मदद

नीट परीक्षा देने आई छात्रा श्रेया सिंह गलती से गलत परीक्षा केंद्र पर पहुंच गई थी। परीक्षा शुरू होने में केवल 15 मिनट का समय बचा था और ऐसी स्थिति में उसका एक साल खराब हो सकता था। इसी दौरान एसीपी विजय चौधरी ने स्थिति को समझा और तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने श्रेया को अपनी सरकारी गाड़ी में बैठाकर सही परीक्षा केंद्र ‘नवीन विधि महाविद्यालय’ पहुंचाया। पुलिस की इस त्वरित मदद से छात्रा समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सकी और परीक्षा में शामिल हो गई। श्रेया और उसके परिजनों ने पुलिस विभाग का आभार जताया।

बस स्टैंड पर मिली मदद, समय पर पहुंची छात्रा

एक अन्य मामले में सरवटे बस स्टैंड पर एक छात्रा परीक्षा के लिए देरी होने के कारण परेशान नजर आई। वहां मौजूद एडिशनल डीसीपी ने छात्रा की स्थिति को समझते हुए उसे अपनी गाड़ी में बैठाया और कृषि कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। समय पर मिली इस सहायता के कारण छात्रा परीक्षा देने में सफल रही। पुलिस अधिकारियों की इस संवेदनशीलता की लोगों ने जमकर प्रशंसा की।

कलेक्टर ने संभाला आधार कार्ड का मामला

नीट री-एग्जाम के दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करने पहुंचे। एसजीएसआईटीएस कॉलेज में उन्होंने एक छात्रा को आधार कार्ड संबंधी समस्या के कारण परेशान और रोते हुए देखा। कलेक्टर ने तुरंत मामले में हस्तक्षेप किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर ही व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए हेल्प डेस्क की कार्यप्रणाली की भी जांच की।

तीन मिनट में समाधान, अधिकारियों को दी चेतावनी

कलेक्टर शिवम वर्मा ने खुद अभ्यर्थी की भूमिका निभाकर दस्तावेज और फोटो उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का परीक्षण किया। उनकी मौजूदगी में महज तीन मिनट में आवश्यक फोटो का प्रिंट उपलब्ध कराया गया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी छात्र को दस्तावेज या तकनीकी कारणों से परेशानी नहीं होनी चाहिए। पुलिस और प्रशासन की इस सक्रियता और मानवीय पहल की शहरभर में सराहना हो रही है।

Navbharat Live
navbharatlive.com