इंदौर 'बल्लाकांड' मामले में आकाश विजयवर्गीय को मिली राहत, पूर्व विधायक समेत सभी 10 आरोपी बरी

इंदौर में साल 2019 में हुए बहुचर्चित बल्लाकांड के सभी आरोपियों को स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों को राहत दे दी है। अदालत ने सोमवार को इंदौर नगर निगम के अधिकारियों की बल्ले से पिटाई के आरोपी कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।
इंदौर 'बल्लाकांड' मामले में आकाश विजयवर्गीय समेत सभी 10 आरोपी बरी
आकाश विजयवर्गीय (सोर्स-सोशल मीडिया)
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इंदौर: इंदौर में साल 2019 में हुए बहुचर्चित बल्लाकांड के सभी आरोपियों को स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों को राहत दे दी है। अदालत ने सोमवार को इंदौर नगर निगम के अधिकारियों की बल्ले से पिटाई के आरोपी कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

विधायकों और सांसदों से जुड़े मुकदमे सुनने वाली अदालत के पीठासीन अधिकारी (न्यायाधीश) देव कुमार ने विजयवर्गीय और नौ अन्य लोगों को आरोपों से मुक्त किया। बचाव पक्ष के वकील उदयप्रताप सिंह कुशवाह ने संवाददाताओं को बताया, "अभियोजन इस मामले में अदालत में आरोप साबित नहीं कर सका। इस कारण अदालत ने विजयवर्गीय और नौ अन्य लोगों को बरी कर दिया, जबकि मामले के एक अन्य आरोपी की हत्या हो चुकी है।"

पूरे मामले की जानकारी देते हुए वकील ने बताया कि घटना के कथित वीडियो की प्रामाणिकता विशेष न्यायालय में साबित नहीं हो सकी और नगर निगम के शिकायतकर्ता अधिकारी धीरेंद्र सिंह बायस और अन्य गवाहों ने अभियोजन की कहानी का अदालत में स्पष्ट रूप से समर्थन नहीं किया। आकाश विजयवर्गीय, राज्य के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं।

क्या है पूरा मामला?

अधिकारियों ने बताया कि तत्कालीन भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय और 10 अन्य लोगों के खिलाफ 26 जून 2019 को नगर निगम के भवन निरीक्षक बायस को क्रिकेट के बल्ले से पीटने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। यह प्राथमिकी भारतीय दंड विधान की धारा 353 (लोक सेवक को भयभीत कर उसे उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिये उस पर हमला), 294 (गाली-गलौज), 323 (मारपीट), 506 (धमकाना), 147 (बलवा) और 148 (घातक हथियारों से लैस होकर बलवा) के तहत दर्ज की गई थी।

कथित घटना के वक्त आकाश विजयवर्गीय शहर के गंजी कम्पाउंड क्षेत्र के एक जर्जर मकान को ढहाने की मुहिम का विरोध कर रहे थे। राज्य में कमलनाथ की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई इस घटना का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया था और इसके बाद तत्कालीन भाजपा विधायक को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें इस मामले में जमानत मिल गई थी।

-एजेंसी इनपुट के साथ

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