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एमपी में जर्जर स्कूलों के जीर्णोद्धार के लिए 2800 करोड़ रुपए जारी होंगे।
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने ग्वालियर में दी जानकारी।
तीन से चार साल से अधूरे सांदीपनि स्कूलों को जल्द हैंडओवर कराने पर जोर।
Madhya Pradesh School Renovation : एमपी में जर्जर हो रहे सरकारी स्कूलों के पुनरुद्धार के लिए राज्य सरकार 2800 करोड़ रुपए जारी करने की योजना बना रही है । इस राशि से स्कूल भवनों की मरम्मत और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे। स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने ग्वालियर प्रवास के दौरान ये जानकारी दी। उन्होंने ये भी कहा कि स्कूलों के नियमित मेंटेनेंस करने पर भी सरकार का जोर है।
एक दिवसीय दौरे पर ग्वालियर पहुंचे स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने शिक्षा विभाग की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इसमें संभागायुक्त मनोज खत्री, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण हरिओम चतुर्वेदी और संभाग के सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में स्कूलों की स्थिति, निर्माण कार्यों और सांदीपनि स्कूलों के संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के अलग अलग जिलों में कई सांदीपनि स्कूल स्वीकृत किए गए हैं लेकिन इनमें से कुछ स्कूल तीन से चार साल बाद भी शुरू नहीं हो पाए हैं या विभाग को हैंडओवर नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि छोटी छोटी तकनीकी और अन्य कमियों के कारण रुके स्कूलों को जल्द हैंडओवर कराकर उनका संचालन शुरू कराना प्राथमिकता है। संभागीय समीक्षा बैठक में ऐसे स्कूलों की समस्याओं का निराकरण करने का निर्णय लिया गया।
मंत्री ने बताया कि फिलहाल सरकार मिनी सांदीपनि स्कूल नहीं बना रही है। हालांकि जिन स्कूलों में पर्याप्त जगह उपलब्ध है वहां भवनों के पुनर्गठन यानी रिस्ट्रक्चरिंग के जरिए निर्माण लागत कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए ग्राउंड प्लस 2 के बजाय ग्राउंड प्लस 4 तक निर्माण की योजना पर विचार किया जा रहा है।
ग्वालियर शहर पहुंचे मंत्री ने बताया उन्होने निर्माण मॉडल को लेकर तकनीकी विशेषज्ञों से चर्चा की है। मंत्री के मुताबिक छत पर स्लैब के स्थान पर फॉल्स रूफ लगाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भवन का वजन कम किया जा सके। सरकार का प्रयास है कि तकनीकी रूप से बेहतर और कम लागत वाला मॉडल तैयार हो।
राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जर्जर स्कूलों के पुनरुद्धार के लिए 2800 करोड़ रुपए जारी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्कूल भवनों के नियमित रखरखाव की व्यवस्था भी की जाएगी ताकि भविष्य में भवनों की स्थिति खराब न हो और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।