पुलिस को इतना मत बेचो कि...भ्रष्टाचार और प्रताड़ना से तंग आकर कांस्टेबल ने दी जान, सुसाइड नोट वायरल

Neemuch News : एमपी के नीमच में कांस्टेबल ने जहर खाकर जान दे दी। होशियार सिंह ने विभाग में भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा है कि पद और सुविधाएं दी जा रहीं हैं।
Do not sell the police so much that... Fed up with corruption and harassment, constable commits suicide, suicide note goes viral
कांस्टेबल होशियार सिंह और उनका सुसाइड नोट।
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MP Constable Suicide Note : मध्य प्रदेश के नीमच जिले में पुलिस महकमे से एक ऐसी खबर आई है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस लाइन कनावटी में तैनात 50 वर्षीय कांस्टेबल होशियार सिंह ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले होशियार सिंह की मौत के बाद उनके परिवार में कोहराम मचा है। वहीं, पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के बीच सन्नाटा पसरा है।

जानकारी के अनुसार होशियार सिंह कुछ समय से हर्निया के ऑपरेशन के कारण छुट्टी पर थे। रविवार को वे अपनी छुट्टी बढ़वाने के सिलसिले में पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे थे। बताया जा रहा कि वहां किसी बात से आहत होकर उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगड़ते देख उन्हें तत्काल जिला अस्पताल और फिर निजी ज्ञानोदय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनकी मौत की खबर सुनते सीएसपी किरण चौहान और कैंट थाना प्रभारी नीलेश अवस्थी अस्पताल पहुंचे।

तीन पन्नों का डेथ नोट और भ्रष्टाचार के आरोप

होशियार सिंह ने मरने से पहले तीन पन्नों का एक शिकायती पत्र लिखा था, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। डीआईजी को संबोधित इस पत्र में उन्होंने विभाग के भ्रष्टाचार की कलई खोलकर रख दी है। उन्होंने लिखा-साहब, पुलिस को इतना भी मत बेचो कि ईमानदार आदमी नौकरी न कर पाए। पत्र में आरोप लगाया गया है कि नीमच जिले में थानों की पोस्टिंग, पीसीआर ड्यूटी, जिम और खेल जैसी सुविधाएं भी पैसों के दम पर बिक रही हैं।

नामजद आरोपों से महकमे में हड़कंप

सुसाइड नोट में कांस्टेबल ने सीधे तौर पर कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों पर आर्थिक एवं मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि विभाग में ड्यूटी लगाने के लिए वसूली की जाती है। जो पैसे देता है, उसे तरजीह मिलती है। पत्र में आरआई और अन्य स्टाफ का नाम लेते हुए उन्होंने अपनी जान को खतरा भी बताया था। फिलहाल पुलिस प्रशासन ने परिजनों की नाजुक स्थिति को देखते हुए बयान सीमित रखे हैं।

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