

Dindori Patwari Strike : डिंडौरी जिले में 16 सूत्रीय मांगों को लेकर पटवारियों की चल रही कलमबंद हड़ताल के बीच अब सियासी हस्तक्षेप बढ़ता नजर आ रहा है। हड़ताल के पांचवें दिन पटवारी संघ डिंडौरी के प्रतिनिधियों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और शाहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को लेकर बिंदुवार चर्चा की। विधायक ने पटवारियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि इनमें से अधिकांश समस्याएं जिला स्तर से जुड़ी हुई हैं।
विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कहा कि कलेक्टर को पटवारी संघ के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करना चाहिए। उन्होंने पटवारी संघ को भरोसा दिलाया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकलता है तो वे अगले सप्ताह स्वयं मौजूद रहकर कलेक्टर और पटवारी संघ के बीच बैठक करवाएंगे। इस आश्वासन के बाद पटवारी संघ को आंदोलन के समाधान की उम्मीद जगी है।
इससे एक दिन पहले हड़ताल के चौथे दिन भाजपा के प्रदेश अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज तेकाम भी पटवारियों के धरना स्थल पहुंचे थे। उन्होंने पटवारियों की समस्याओं को सुना और उनकी मांगों को लेकर राजस्व मंत्री से फोन पर चर्चा की। पटवारी संघ के अनुसार, तेकाम ने संघ का ज्ञापन राजस्व मंत्री तक पहुंचाने के साथ मुख्यमंत्री तक भी उनकी समस्याएं पहुंचाने का आश्वासन दिया।
सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं के आंदोलन स्थल पर पहुंचने और पटवारियों की मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाने के बाद संघ इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देख रहा है। पटवारी संघ का कहना है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना इस बात का संकेत है कि अब मांगों के निराकरण की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सकती है।
डिंडौरी के पटवारियों के आंदोलन को दूसरे जिलों से भी समर्थन मिलने की बात सामने आई है। पटवारी संघ के मुताबिक, अलीराजपुर समेत कई जिलों में पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे हैं। इन ज्ञापनों में डिंडौरी के पटवारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए समस्याओं का समाधान कराने की मांग की गई है।
डिंडौरी जिले के सभी पटवारी 1 सितंबर 2026 से 16 सूत्रीय मांगों को लेकर कलमबंद हड़ताल पर हैं। संघ की प्रमुख मांगों में ई-अटेंडेंस, अनावश्यक कार्रवाई पर रोक, ट्रांसफर किए गए पटवारियों की रिलीविंग और तहसीलदारों के ट्रांसफर सहित अन्य मांगें शामिल हैं। आंदोलन के पांचवें दिन विधायक और भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप के बाद अब कलेक्टर और पटवारी संघ के बीच प्रस्तावित बैठक पर नजर है। यदि बैठक होती है तो लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने की दिशा में रास्ता निकल सकता है।