डिंडौरी में जमीन घोटाला, हाईकोर्ट की रोक के बावजूद बेच डाली करोड़ों की पैतृक जमीन; पूर्व तहसीलदार पर FIR दर्ज

Land Scam In Dindori: डिंडौरी में जमीन घोटाला, हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद बेची करोड़ों की पैतृक भूमि, कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार और पटवारी समेत 4 पर FIR दर्ज।
Dindori land scam surfaces despite High Court stay order
डिंडौरी लैंड स्कैम (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dindori Land Scam: मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला अब कानूनी कार्रवाई के दौर में पहुंच गया है। जिला न्यायालय के आदेश के बाद कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, तत्कालीन पटवारी और पिता-पुत्र समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला उस जमीन से जुड़ा है, जिस पर वर्ष 2006 से हाईकोर्ट द्वारा विक्रय पर रोक लगी हुई थी।

हाईकोर्ट की रोक के बावजूद जमीन बेचने का आरोप

डिंडौरी नगर निवासी बबलू सोनपाली के अनुसार, स्वर्गीय बालमुकुंद सोनपाली की करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। आरोप है कि एमपी हाईकोर्ट की रोक के बावजूद स्वर्गीय बालमुकुंद के पुत्र नंदलाल सोनपाली ने कथित रूप से फर्जी वसीयतनामा तैयार कराया और उसके आधार पर जमीन का नामांतरण करवा लिया। इसके बाद विवादित जमीन का करोड़ों रुपये में विक्रय भी कर दिया गया।

शिकायत के बाद कोर्ट पहुंचा मामला

इस पूरे मामले की शिकायत स्वर्गीय बालमुकुंद सोनपाली के नाती इंद्रपाल सोनपाली ने संबंधित अधिकारियों से की थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने जिला न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए।

पूर्व तहसीलदार और पटवारी सहित चार आरोपी

जिला न्यायालय के आदेश के बाद डिंडौरी कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे, तत्कालीन पटवारी हीरेंद्र सुर्याम, नंदलाल सोनपाली और उनके पुत्र रोहित सोनपाली के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की गहन जांच कर रही है।

दस्तावेजों की जांच में जुटी पुलिस

यह मामला डिंडौरी जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसमें करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति और राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का आरोप है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

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