गोबर से गैस, गैस से भोजन: डिंडौरी में बिहारी लाल साहू ने पेश की आत्मनिर्भर खेती की मिसाल
Food From Biogas: डिंडौरी में नर्मदांचल गौ सेवा समिति बायोगैस से भोजन बना रही है। बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित समिति किसानों को ट्रेनिंग देती है। साथ ही जैविक उत्पादों को बनाती और बेचती भी है।
- Written By: प्रीतेश जैन
बायोगैस प्लांट (फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन)
Dindori Biogas Project: डिंडौरी के ढोंढ़ा स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गोबर गैस (बायोगैस) के उपयोग से भोजन बनाने की शुरुआत हो गई है। इस पहल से एलपीजी गैस की खपत में कमी आएगी और किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग का व्यावहारिक उदाहरण मिलेगा। समिति का संचालन जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू द्वारा किया जाता है, जो पिछले एक दशक से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
बिहारी लाल साहू ने बताया कि गोबर गैस संयंत्र पशुओं के गोबर और अन्य जैव-अपघटनीय पदार्थों से तैयार किया गया है। संयंत्र में गोबर का घोल डाला जाता है, जिससे ऑक्सीजन रहित प्रक्रिया के माध्यम से बायोगैस का निर्माण होता है। इस गैस में लगभग 55 से 65 प्रतिशत मीथेन और 30 से 40 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड पैदा होती है, जिसका उपयोग सीधे रसोई में भोजन पकाने के लिए किया जा रहा है।
कई सालों तक चलता है संयंत्र
उन्होंने बताया कि बायो गैस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोग की जाती है, जिससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। एक बार स्थापित होने के बाद यह संयंत्र कई सालों तक सुचारू रूप से काम करता है।
सम्बंधित ख़बरें
मध्य प्रदेश के 1.5 लाख अध्यापकों को भी देनी होगी TET परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में हड़कंप
Ujjain News: महाकाल दर्शन के नाम पर साइबर ठगी पर शिकंजा, उज्जैन पुलिस ने बंद कराईं 11 फर्जी वेबसाइटें
भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में भीषण आग, करोड़ों का नुकसान, कई घंटों की मशक्कत के बाद पाया गया काबू
ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी: हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर हुई 6, कमिश्नर ने की घायलों से मुलाकात, मुआवजे का एलान
जैविक खेती के प्रशिक्षण का बना केंद्र
नर्मदांचल गौ सेवा समिति जैविक खेती के प्रशिक्षण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। बिहारी लाल साहू अब तक प्राकृतिक और जैविक खेती पर करीब 20 हजार विद्यार्थियों और 80 हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। यहां किसानों, विद्यार्थियों, शासकीय संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों को जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव और लाइव डेमो भी उपलब्ध कराया जाता है।
किसानों को मिल रही प्राकृतिक खेती की जानकारी
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और आत्मा परियोजना के तहत यहां किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। जिले में 33 बीआरसी किसानों को इस मॉडल से जोड़ा गया है। केंद्र पर प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाता है।
ये भी पढ़ें : जल क्रांति की ओर मध्यप्रदेश, ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत रिकॉर्ड 2 लाख से अधिक संरचनाओं का कार्य पूरा
जैविक खाद और उत्पादों का निर्माण
समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक उत्पादों का निर्माण और विक्रय किया जाता है। इनमें केंचुआ खाद, वर्मीवॉश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र और बीज उपचार जैसे उत्पाद शामिल हैं। साथ ही किसानों को इन उत्पादों के उपयोग और निर्माण की जानकारी भी निःशुल्क प्रदान की जाती है। फार्म पर केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी और मेथी सहित कई फसलें जैविक पद्धति से उगाई जा रही हैं।
