Highlights :
दतिया में रतनगढ़ वाली माता का अनोखा धाम।
इतिहास और रहस्यमयी मान्यताओं का अनूठा संगम।
भाई दूज पर होता है विशाल लक्खी मेले का आयोजन।
400 से 600 साल पुराना है मंदिर का इतिहास।
Datia Ratangarh Mata Mandir : दतिया जिले से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित मां रतनगढ़ वाली माता का प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है। घने जंगलों और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित ये धाम सालभर भक्तों को आकर्षित करता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है।
दीपावली के दूसरे दिन भाई दूज पर यहां लगने वाला विशाल लक्खी मेला मंदिर की खास पहचान है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता रानी और कुंवर बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीयों के अनुसार करीब 400 से 600 साल पहले इस क्षेत्र में राजा रतन सिंह का शासन था। उनकी पुत्री राजकुमारी मांडूला और पुत्र कुंवर गंगारामदेव की कथाएं आज भी क्षेत्र की लोकपरंपराओं में प्रचलित हैं। श्रद्धालु कुंवर गंगारामदेव को कुंवर बाबा के नाम से पूजते हैं।
प्रचलित लोककथा के अनुसार अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने रतनगढ़ की ओर आने वाले पानी को रोक दिया था। राजकुमारी मांडूला और कुंवर गंगारामदेव ने इसका विरोध किया। इसके बाद सेना ने किले पर आक्रमण कर दिया था। मान्यता है कि संकट की घड़ी में राजकुमारी मांडूला ने जंगल में समाधि ले ली और बाद में उन्हें देवी के रूप में पूजा जाने लगा।
नवरात्रि त्योहार पर भी मंदिर में मां रतनगढ़ वाली के साथ कुंवर बाबा के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
दतिया जिला में स्थित रतनगढ़ मंदिर को लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके गुरु समर्थ रामदास से संबंधित मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि शिवाजी महाराज ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
मां रतनगढ़ वाली के दरबार में मन्नत पूरी होने पर घंटे चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर में घंटा अर्पित करते हैं। मंदिर में लगभग 930 किलोग्राम वजन का विशाल घंटा होने की बात भी कही जाती है। ये परंपरा भक्तों की आस्था और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं को दर्शाती है।
रतनगढ़ धाम में सर्पदंश और बिच्छू के काटने से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालु यहां आकर आस्था के साथ संकल्प लेते हैं जिसे स्थानीय भाषा में ‘बंद लगाना’ कहा जाता है। हालांकि, सांप या बिच्छू के काटने की स्थिति में बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना और उचित इलाज कराना बेहद जरूरी है।
दीपावली के दूसरे दिन भाई दूज पर लगने वाले लक्खी मेले के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और माता रानी तथा कुंवर बाबा के दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से पहुंचते हैं।