

Tribal Child Malnutrition Death: मध्य प्रदेश के दतिया जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सलैया पावर के आदिवासी डेरे में कुपोषण का गंभीर मामला सामने आया है। करीब 500 की आबादी वाले इस डेरे में कुपोषण की स्थिति का खुलासा बीते सोमवार जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त से पीड़ित एक साल की बच्ची नीलू आदिवासी की उपचार के दौरान मौत के बाद हुआ।
बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज कर रहे चिकित्सकों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद पूरे डेरे में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है।
मृतक बच्ची के परिजनों का आरोप है कि नीलू को जिला अस्पताल में ब्लड चढ़ाया गया और ग्लूकोज की ड्रिप भी लगाई गई। इसके बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजनों के मुताबिक उपचार के दौरान बच्ची को खून की उल्टी हुई और फिर उसकी मौत हो गई। परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही लापरवाही की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कुपोषण की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी टीम के साथ आदिवासी डेरे में पहुंचे हैं। एसडीएम दतिया सोनाली राजपूत भी पूरे मामले की जांच में जुटी हैं। उन्होंने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। सीएमएचओ वीके वर्मा के अनुसार कलेक्टर ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। फिलहाल डेरे में करीब आधा दर्जन बच्चों के कुपोषित होने की जानकारी सामने आई है।
सलैया पावर का यह आदिवासी डेरा वर्ष 2022 में नवाचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सम्मानित हो चुका है। इसके बावजूद वर्तमान में यहां बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी बताई जा रही है। डेरे में आंगनबाड़ी केंद्र और आरोग्यधाम स्वास्थ्य केंद्र भी मौजूद हैं, लेकिन ग्रामीण सरकारी सुविधाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। निरक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता की कमी भी बड़ी चुनौती है। एक बच्ची की मौत के बाद अब प्रशासन के सामने कुपोषित बच्चों की पहचान, बेहतर उपचार और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के साथ पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है।