

Sanjana Singh Contesting For Datia By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव इस बार महज एक राजनीतिक सीट का मुकाबला नहीं है। यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र की मुख्यधारा में एक ऐसे वर्ग की भागीदारी का गवाह बनने जा रहा है, जिसे अब तक हाशिए पर देखा जाता रहा है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह (संजना नंद गिरि) ने नामांकन दाखिल कर चुनावी अखाड़े में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।
संजना सिंह का चुनाव लड़ना केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य किन्नर समाज को नीति निर्माण की मुख्यधारा तक पहुंचाना है। संजना का मानना है कि एक ऐसे समाज के प्रतिनिधि के तौर पर, जिसका न तो कोई परिवार है और न ही कोई उत्तराधिकारी, वे किसी भी प्रकार के निजी स्वार्थ या भ्रष्टाचार से मुक्त होकर पूरी निष्ठा से जनता की सेवा कर सकती हैं।
संजना सिंह की छवि एक बेहद शिक्षित और अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता की रही है:
इस चुनावी अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संजना सिंह के समर्थन में देशभर के किन्नर समुदाय और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि दतिया पहुंच रहे हैं। उनका लक्ष्य केवल जीत हासिल करना नहीं है, बल्कि समाज के भीतर किन्नरों के प्रति बनी संकुचित सोच को बदलना और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हक दिलाना है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब किन्नर समाज ने मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया हो। इससे पहले शबनम मौसी ने सुहागपुर सीट से विधायक बनकर एक मिसाल कायम की थी। अब संजना सिंह की यह दावेदारी दतिया की जनता के लिए एक नया विकल्प और लोकतंत्र के समावेशी स्वरूप को दर्शाने वाली एक बड़ी घटना बन गई है।
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