

Highlights:
छतरपुर में 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ज्ञानेश कुमार, मंत्रियों और भाजपा के चारों विधायकों के पुतले जलाने का प्रयास किया।
पुतला दहन रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झूमाझटकी हुई।
पुलिस ने पुतले को अपने कब्जे में ले लिया, जिसके बाद मौके पर हंगामे की स्थिति बनी।
Chhatarpur OBC Reservation Protest : छतरपुर में 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मंत्रियों और भाजपा के चारों विधायकों के पुतले जलाने का प्रयास किया। पुलिस ने पुतला दहन रोकने की कोशिश की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच खींचतान और झूमाझटकी की स्थिति बन गई। घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
ओबीसी महासभा के कार्यकर्ता 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर विरोध जताने सड़क पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सरकार और संबंधित जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी की। संगठन के कार्यकर्ता आरक्षण के मुद्दे पर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री, मुख्य चुनाव आयुक्त, मंत्रियों और भाजपा के छतरपुर जिले के चारों विधायकों के पुतले दहन करने की तैयारी की।
OBC आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के पुतला दहन करने के प्रयास के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान पुतले को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान शुरू हो गई। देखते ही देखते स्थिति झूमाझटकी तक पहुंच गई। पुलिस ने पुतले को अपने कब्जे में ले लिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया और मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई।
छतरपुर में हुए इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुतला दहन को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई खींचतान के कारण यह प्रदर्शन चर्चा में है। हालांकि, घटनाक्रम के बाद पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
ओबीसी महासभा के कार्यकर्ता 52 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं। छतरपुर में हुआ प्रदर्शन इसी मांग के समर्थन में आयोजित किया गया। संगठन ने विरोध के जरिए सरकार और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आरक्षण के मुद्दे की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। अब इस मांग पर सरकार की प्रतिक्रिया और संगठन के अगले कदम पर नजर रहेगी।