छतरपुर के अनगौर वन क्षेत्र में रेंजर पर गंभीर आरोप, वन भूमि किसानों को कथित रूप से किराए पर देने का दावा

Chhatarpur News : छतरपुर के अनगौर वन क्षेत्र में रेंजर पर सरकारी वन भूमि किसानों को कथित रूप से किराए पर देने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
Chhatarpur Forest Land Case
वन विभाग की जमीन किसानों को देने का आरोप (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Chhatarpur Forest Land Case : छतरपुर जिले के अनगौर वन क्षेत्र में वन विभाग के एक रेंजर पर सरकारी वन भूमि के कथित दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि वन विभाग की जमीन को नियमों के विपरीत किसानों को कथित रूप से किराए पर दिया जा रहा है। आरोप सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी जंगलों और सरकारी जमीन की सुरक्षा करना है, लेकिन अनगौर क्षेत्र में इसके विपरीत स्थिति नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन भूमि का उपयोग निजी हितों के लिए किया जा रहा है, जिससे जंगलों के संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की जांच की जाए तो वन भूमि के उपयोग से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।

ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा पूरे मामले की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि कार्रवाई होने से भविष्य में वन भूमि के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सकेगी और जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

वन क्षेत्र में गतिविधियों को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार वन क्षेत्रों में जमीन के उपयोग और संरक्षण को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी भूमि की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि वन संपदा को नुकसान न पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच शुरू की जाए।

वन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया

फिलहाल इस मामले में वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। समाचार में शामिल आरोप स्थानीय लोगों के दावों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी या विभाग का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। अब लोगों की नजर वन विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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