राज्यसभा चुनाव विवाद पर मंत्री सारंग का कांग्रेस पर हमला, बोले- क्रॉस वोटिंग के डर से कराया गया नामांकन निरस्त

Bhopal Political News: विश्वास सारंग ने राज्यसभा चुनाव विवाद पर कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर था, इसलिए ऐसा नामांकन दाखिल किया गया जो निरस्त हो जाए।
Vishvas Sarang Statement On Rajya Sabha Election
मंत्री विश्वास सारंग (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Vishwas Sarang Statement On Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में सारंग ने दावा किया कि यदि राज्यसभा की तीसरी सीट पर चुनाव होता तो भाजपा की ही जीत होती, क्योंकि कांग्रेस को अपने विधायकों में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा था।

भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को पहले से इस बात का अंदेशा था कि उसके 25 से 30 विधायक "आत्मा की आवाज" पर मतदान करते हुए भाजपा के पक्ष में वोट कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी संभावित राजनीतिक नुकसान और सार्वजनिक शर्मिंदगी से बचने के लिए कांग्रेस ने जानबूझकर ऐसा नामांकन दाखिल कराया, जो तकनीकी आधार पर निरस्त हो जाए।

राजनीतिक विफलता को छिपाने के लिए आरोप लगा रही कांग्रेस

विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस अब अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में न तो चुनाव आयोग की कोई गलती है और न ही भारतीय जनता पार्टी की कोई भूमिका है। उनके अनुसार नामांकन पत्रों की जांच निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की गई है।

RO पर लग रहे आरोपों को नकारा

मंत्री ने कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर पर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि जब किसी उम्मीदवार के नामांकन में आवश्यक जानकारी या दस्तावेजों से जुड़ी त्रुटियां पाई जाती हैं तो निर्वाचन अधिकारी को नियमों के अनुसार निर्णय लेना होता है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंची है कांग्रेस

गौरतलब है कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक न्यायालयीन प्रकरण की जानकारी शपथ पत्र में दर्ज नहीं करने के आरोप में निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले को गैरकानूनी बताते हुए पहले चुनाव आयोग और फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है। नामांकन निरस्त होने के बाद प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें इस मामले में न्यायालय की आगामी सुनवाई और संभावित फैसले पर टिकी हुई हैं।

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