

MP Rajya Sabha Election Controversy: मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के खिलाफ कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन कर निर्वाचन शाखा की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई।
भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि चुनाव आयोग चाहता तो इस मामले में बुधवार को ही फैसला कर सकता था, लेकिन कांग्रेस की आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में मामलों पर त्वरित निर्णय लेने वाला आयोग इस प्रकरण में निष्क्रिय बना रहा।
उमंग सिंघार ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की अनदेखी की, जिसके चलते कांग्रेस को न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि न्यायालय के निर्णय से पहले चुनाव परिणाम घोषित किए जाते हैं तो यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ होगा।
इधर, गुरुवार को पीसी शर्मा अपने समर्थकों के साथ विधानसभा पहुंचे और विधानसभा गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा की निर्वाचन शाखा भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। शर्मा ने दावा किया कि कांग्रेस को जानकारी मिली है कि भाजपा के तीनों राज्यसभा उम्मीदवारों को निर्वाचित होने का प्रमाणपत्र दिए जाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक किसी भी उम्मीदवार को जीत का प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक न्यायालयीन प्रकरण की जानकारी शपथ पत्र में दर्ज नहीं करने के आधार पर निरस्त किया गया था। कांग्रेस इस कार्रवाई को गैरकानूनी और पक्षपातपूर्ण बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि नामांकन निरस्तीकरण का फैसला नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप लिया गया है। अब इस मामले पर सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हुई है।