केन-बेतवा आंदोलन पर उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले- लाठी और गिरफ्तारी से नहीं, संवाद से चलता है लोकतंत्र

Amit Bhatnagar Arrest: केन-बेतवा लिंक परियोजना आंदोलन पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा। उन्होंने अमित भटनागर सहित आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए रिहाई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
Umang Singhar On Ken Betwa Link Project Protest
उमंग सिंघार (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Umang Singhar On Ken Betwa Link Project Protest: छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन और आंदोलनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। अब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए और सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने की मांग की।

उमंग सिंघार ने अपने पोस्ट में लिखा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने असहमति की आवाजों को दबाना अपना शासन मॉडल बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन लोगों से डरती है, जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं।

अमित भटनागर सहित आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी पर जताई नाराजगी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक दिन पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक और उनके साथियों को हटाया गया और इसके बाद छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे अमित भटनागर सहित अन्य लोगों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि केन-बेतवा परियोजना में कथित भ्रष्टाचार, कानून के उल्लंघन और आदिवासी अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें गिरफ्तार किया गया।

14 जुलाई को आंदोलन स्थल पहुंचे थे उमंग सिंघार

उमंग सिंघार ने कहा कि वह खुद 14 जुलाई को आंदोलन स्थल पहुंचे थे और वहां मौजूद लोगों की समस्याएं सुनी थीं। उन्होंने आंदोलनकारियों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई में साथ खड़े रहने का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित परिवारों और आंदोलनकारियों से बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन उसने संवाद की जगह कार्रवाई का रास्ता चुना।

'क्या भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना भी अपराध हो गया?'

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या अब देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना भी अपराध माना जाएगा? क्या किसानों, आदिवासियों और प्रभावित परिवारों की मांगों का जवाब पुलिस कार्रवाई से दिया जाएगा? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संविधान और संवाद से चलता है, न कि लाठी और गिरफ्तारी से। लगातार दो दिनों में शांतिपूर्ण आंदोलनों पर हुई कार्रवाई को उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय बताया।

आंदोलनकारियों की रिहाई और जांच की मांग

उमंग सिंघार ने अमित भटनागर सहित सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग की है। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रभावित लोगों की बात सुनी जाए और केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़े आरोपों एवं शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और हर नागरिक को सवाल पूछने का संवैधानिक अधिकार है। अब इस मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

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