भोपाल में झुग्गी शिफ्टिंग पर विवाद, हाईटेंशन लाइन के नीचे बसा दिए परिवार; सुरक्षा और पर्यावरण पर खड़े हुए सवाल

Bhopal News: बावड़ियाकलां स्थित दीपक नगर झुग्गी बस्ती से जिला प्रशासन ने करीब 35 परिवारों को जल्दबाजी में बाग मुगलिया एक्सटेंशन इलाके में स्थानांतरित कर दिया।
Bhopal Slum Shifting Bag Mugalia High Tension Line Controversy News Update
झग्गिवासियों को किया शिफ्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bhopal Slum Shifting Controversy: भोपाल के बावड़ियाकलां स्थित दीपक नगर झुग्गी बस्ती से कुछ ही दिनों पहले जिला प्रशासन ने करीब 35 परिवारों को जल्दबाजी में बाग मुगलिया एक्सटेंशन इलाके में स्थानांतरित कर दिया। जिस स्थान पर इन परिवारों को बसाया गया है, वह ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में आता है और उसके ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन भी गुजर रही है।

ऐसे में इस शिफ्टिंग को लेकर पर्यावरण के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं, इसका लोगों ने विरोध भी जताया।

हाई टेंशन लाइन के नीचे झुग्गियां का निर्माण शुरू

पेड़ों के बीच और हाईटेंशन बिजली लाइन के नीचे झुग्गियों का निर्माण शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार कोलार क्षेत्र के पटवारी और आरआई ने बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित श्मशान घाट के सामने दीपक नगर से आए झुग्गीवासियों को जमीन की नापजोख कर जगह आवंटित की। इसके बाद वहां बांस-बल्ली लगाकर झुग्गियां तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।

जानकारी के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

बता दें की इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव, संभाग आयुक्त, जिला कलेक्टर समेत जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में एक जगह की झुग्गी हटाकर दूसरी जगह झुग्गी बसाने से भोपाल झुग्गी मुक्त कैसे होगा?

अरेड़ी में अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई

शनिवार को प्रशासन ने अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए ग्राम अरेड़ी स्थित शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाया। प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में खसरा क्रमांक 292 और 293 की करीब 2 एकड़ सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर राजस्व विभाग और पुलिस बल भी तैनात रहा, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार इस जमीन का शासकीय गाइडलाइन मूल्य करीब 2 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जबकि बाजार में इसकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपए आंकी गई है। प्रशासन द्वारा इस सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर यहां प्रस्तावित शासकीय प्रोजेक्ट को विकसित किया जाएगा।

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