'अंग्रेजी होती राष्ट्रभाषा तो देश में नहीं होती नफरत', पूर्व IAS नियाज खान का बड़ा बयान; छेड़ी नई बहस

Madhya Pradesh News: पूर्व आईएएस रहे नियाज खान ने गुरुवार को तीन अलग-अलग पोस्ट किए हैं, जिसमें से ताजा ट्वीट में उन्होंने देश की राष्ट्रभाषा अंग्रेजी होने की वकालत की है।
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नियाज खान (सोर्स- सोशल मीडिया)
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अगर आजादी के बाद राष्ट्र भाषा अंग्रेजी होती तो देश में अंधविश्वास और नफ़रत की जगह वैज्ञानिक सोच और प्रेम होता। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा- पूर्व आईएएस नियाज खान

Niyaz Khan On National Language: मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस रहे नियाज खान पिछले साल रिटायर हुए हैं। ब्राह्मण द ग्रेट नॉवेल नियाज खान ने अपने सेवाकाल में ही लिखा था। गुरुवार को खान ने तीन अलग-अलग पोस्ट किए हैं, जिसमें से ताजा पोस्ट में उन्होंने देश की राष्ट्रभाषा अंग्रेजी होने की वकालत की है। हालांकि खान ने अपने पोस्ट में हिन्दी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। जानिए खान के तीनों पोस्ट में कौन-कौन निशाने पर रहा। नियाज खान ने अपने पोस्ट में अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने का समर्थन किया है, जिसके बाद उनके बयान को लेकर बहस शुरू हो गई। वहीं एक अन्य पोस्ट में उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर जैसे मुस्लिम नेताओं पर निशाना साधते हुए टिप्पणी भी की।

पोस्ट के जरिए की अंग्रेजी को राष्ट्रभाषा बनने की वकालत

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान लिखते हैं कि अगर आजादी के बाद राष्ट्र भाषा अंग्रेजी होती तो देश में अंधविश्वास और नफ़रत की जगह वैज्ञानिक सोच और प्रेम होता। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा। बता दें की इसके अलावा उन्होंने एक और पोस्ट किया है जिसके जरिए उन्होंने ओवैसी और हुमायूं कबीर पर निशाना साधा है।

ओवैसी और हुमांयू कबीर को लेकर क्या कहा?

बता दें की नियाज खान ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि ओवैसी और हुमायूं कबीर जैसे मुस्लिम नेता मुस्लिमों की कब्र खोदकर ही मानेंगे। आज मुस्लिम विकास के नाम पर ज़ीरो है ऊपर से ये नेता इन्हें बर्बाद कर के छोड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने एक और पोस्ट किया और लिखा कि विश्व आज वैज्ञानिक सोच की ओर बढ़ रहा है और चांद पर बसने की तैयारी में है पर हम धर्म और अंधविश्वास की ओर डूबते चले जा रहे हैं। अंधविश्वास का समंदर फैलता जा रहा है। इससे दुनियां में हम अत्यधिक पिछड़े समझे जा रहे हैं। आज चीन वैज्ञानिक सोच से सुपर पॉवर बन गया और हम? सोचें जरा इसपर।

ब्रह्मणो के लिए आरक्षण की मांग

नियाज खान ने इस बार ब्राह्मण समाज की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का समर्थन करते हुए उन्हें 'आरक्षण' देने की वकालत की है। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया बॉलीवुड ब्राह्मणों के लिए नर्क की दुनिया है, जो ब्राह्मण समाज व धर्म-संस्कृति को बर्बाद कर रहा है। ब्राह्मण कलाकारों को तत्काल फिल्मी दुनिया छोड़ देना चाहिए। ये सलाह ब्राह्मणों को मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर नियाज खान ने अपनी आने वाली एक किताब में दी है।

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