Wheat Procurement MP : किसान हितैषी नीतियों से कृषि उत्पादन में हुई वृद्धि , विदेशी बाजारों बढ़ी MP की साख

MP Wheat Export Quality: देश के कुल गेंहू उत्पादन में MP का योगदान 18 प्रतिशत । अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेंहूं की मांग लगातार बनी हुई है। इस साल गेंहू उत्पादन पहुंचा 365.11 लाख मीट्रिक टन ।
mp wheat varieties quality sharbati durum export market
विदेशो में बढ़ी मध्य प्रदेश गेंहू की डिमांड , सोर्स सोशल मीडिया
Published on
Updated on

MP Wheat Global Demand: मध्य प्रदेश में सीएम डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और योजनाओं के परिणामस्वरूप इस साल गेंहू उत्पादन 365.11 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। उत्पादकता बढ़कर 3780 किलो प्रति हेक्टेयर हो गई है।

मध्यप्रदेश “गेंहूं प्रदेश” बन गया है। देश के कुल गेंहू उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 18 प्रतिशत है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मध्यप्रदेश के गेंहूं की मांग लगातार बनी हुई है।

मध्यप्रदेश का गेहूं ब्रेड, बिस्किट और पास्ता के लिये उपयुक्त

प्राकृतिक मिठास के कारण शरबती और डयूरम गेंहू की मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में बनी हुई है।भारत से विदेशों को निर्यात किये जाने वाले गेहूँ में मध्यप्रदेश का योगदान 35 से 40 प्रतिशत होता है। प्रदेश के गेहूँ को ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सउदी अरब, मलेशिया, साउथ अफ्रीका और इंडोनेशिया में पसंद किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का गेहूं ब्रेड, बिस्किट और पास्ता के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है।

क्या है मध्यप्रदेश के गेंहूं में

भारत सरकार के गेहूँ अनुसंधान निदेशालय ने अपने अनुसंधान में दो हजार सेम्पल का परीक्षण करने के बाद उच्च स्तर की गुणवत्ता का दाना पाया। प्रदेश के सामान्य से सामान्य किस्म के गेहूँ में भी औसत रूप से 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) आयरन तथा 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है। कठिया प्रजाति के गेहूँ में भरपूर प्रोटीन, आयरन, मैग्नीज और जिंक है। इन्हीं विशेषताओं से मध्यप्रदेश के गेहूँ को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

एमपी के गेंहू की विशेषताएं

प्रदेश में गेंहूं की जो किस्में उगाई जाती हैं उनकी अपनी विशेषताएं हैं, जैसे जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू. 3020 और जे.डब्ल्यू. 321 नामक गेहूँ की किस्में - एक सिंचाई में 35 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं। जे.डब्ल्यू. 1142, जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1203 किस्मों से अधिक तापमान में भी बेहतर उत्पादन मिलता है। जे.डब्ल्यू. 1202 और जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1106 किस्में प्रोटीन से भरपूर हैं। एमपीआर 1215 और जे.डब्ल्यू. 3211 किस्में निर्यात के लिये बेहतर है।

गेहूँ की 51 किस्मों का विकास

पौष्टिक आहार बनाने के लिये गेहूँ वर्ष 2026 में की जो पाँच किस्में उपयोग में आ रही हैं उनमें से चार मध्यप्रदेश में विकसित की गई हैं। इनमें एम.पी.ओ. 1215, एम.पी. 3211, एम.पी. 1202 एवं एम.पी. 4010 शामिल हैं। मध्यप्रदेश में अब तक गेहूँ की 51 किस्मों का विकास हुआ है। इनमें से 12 किस्मों का विकास सिर्फ एक दशक की अल्प अवधि में हुआ है।

100 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर गेंहू खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्रिक टन हो गया है। प्रदेश में गेंहू का उपार्जन जारी है। किसानों के लिए उपार्जन केन्द्रों में पूरे इंतजाम किए गये हैं। गेहूँ उपार्जन 23 मई तक चलेगा। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com