

MP Teacher Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने साल 2026 की नई शिक्षक स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। इस बार तबादला प्रक्रिया 15 जुलाई तक पूरी की जाएगी, जबकि अगले साल से इसे ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान ही संपन्न कराने की योजना है। नई नीति में शैक्षणिक प्रदर्शन, डिजिटल उपस्थिति और विशेष श्रेणियों को प्राथमिकता देते हुए कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं।
नई नीति के अनुसार माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षक स्वैच्छिक स्थानांतरण में पहली प्राथमिकता के पात्र होंगे। ऐसे शिक्षक अपनी पसंद के स्थान पर पदस्थापना के लिए दावेदारी कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि इससे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
इस बार ट्रांसफर पॉलिसी को डिजिटल उपस्थिति प्रणाली से भी जोड़ा गया है। "हमारे शिक्षक" ऐप के माध्यम से नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज करने वाले शिक्षक ही स्वैच्छिक स्थानांतरण के पात्र होंगे। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में जनवरी से मार्च के बीच नियमित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने वाले शिक्षकों को ही पात्र माना जाएगा। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगामी सालों में पूरे सत्र की ई-अटेंडेंस को आधार बनाया जाएगा।
नई नीति के अनुसार जिन शिक्षकों का स्वैच्छिक स्थानांतरण पिछले तीन वर्षों में हो चुका है, वे सामान्य परिस्थितियों में दोबारा स्थानांतरण के लिए पात्र नहीं होंगे। केवल विशेष परिस्थितियों में ही ऐसे मामलों पर विचार किया जाएगा। मॉडल स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और सांदीपनि विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी न हो।
पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा इस वर्ष भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। इसके लिए दोनों शिक्षकों का समान पद, विषय, संवर्ग और कैडर में होना अनिवार्य होगा। पात्रता शर्तें पूरी होने पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
नई नीति में ई-अटेंडेंस को पात्रता का आधार बनाए जाने पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि प्रदेश के कई स्कूल दूरस्थ और नेटवर्क-विहीन क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां तकनीकी कारणों से नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षक नियमित रूप से स्कूल में उपस्थित रहते हैं, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में केवल ई-अटेंडेंस को आधार बनाना न्यायसंगत नहीं है।