

Rajya Sabha Candidate List MP: मध्यप्रदेश में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। चुनावी बिसात बिछाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, दोनों ही खेमों में रणनीतिक तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। प्रत्याशियों के नामों को लेकर बुधवार को दिल्ली से लेकर भोपाल तक राजनीतिक हलचल तेज रही।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने चुनाव के लिए अपनी रणनीतिक तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की भोपाल वापसी के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने संभावित नामों पर प्रदेश नेतृत्व से अंतिम चर्चा कर ली है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे विकास कार्यों से जुड़ी शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें राज्यसभा चुनाव की रणनीति और क्षेत्रीय-सामाजिक समीकरणों पर गंभीर मंथन हुआ है। इससे पहले, प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दो दिनों तक दिल्ली में डेरा डाले हुए थे, जहां उन्होंने प्रदेश संगठन का जमीनी फीडबैक केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा। अब गेंद पूरी तरह केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) के पाले में है और अगले 48 घंटों में दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही अधिकृत नामों का ऐलान कर दिया जाएगा।
दूसरी ओर, राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस खेमे में दावेदारों की फेहरिस्त लगातार लंबी होती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी और सीडब्ल्यूसी सदस्य कमलेश्वर पटेल के नामों की चर्चा पहले से ही थी, लेकिन अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम सामने आने के बाद मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
इस रस्साकशी के बीच उम्मीदवारों के चयन को लेकर 5 जून को दिल्ली में एक बड़ी और निर्णायक बैठक होने जा रही है। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मध्य प्रदेश के दिग्गज नेताओं के साथ अंतिम फैसला लेंगे। बैठक में शामिल होने के लिए मप्र कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार दिल्ली रवाना हो रहे हैं। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है और 5 जून की बैठक के बाद ही स्थिति साफ होगी।
राज्यसभा चुनाव में संख्या बल के आधार पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन कांग्रेस की एक सीट को लेकर जारी आंतरिक मंथन ने राजनीतिक उत्सुकता बढ़ा दी है। दोनों दलों के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद प्रदेश की सियासत में चुनावी समीकरण और अधिक स्पष्ट होंगे।