2029 तक मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य, CM मोहन यादव बोले- ड्रग्स के पूरे सिंडिकेट को करेंगे ध्वस्त

CM Mohan Yadav News : मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2029 तक मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य दोहराया। सरकार ड्रग सिंडिकेट, साइबर अपराध और संगठित अपराध के नेटवर्क पर कार्रवाई तेज करेगी।
CM Mohan Yadav reviews anti-drug action and law and order in Madhya Pradesh
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ली मीटिंगफोटो सोर्स- नवभारत
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MP Nasha Mukt 2029 : मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने मादक पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आह्वान पर मध्यप्रदेश को वर्ष 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर सघन प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के साथ साइबर अपराध, अवैध हथियार और संगठित अपराध के नेटवर्क पर भी लगातार प्रहार किया जा रहा है। नशामुक्त मध्यप्रदेश के लिए पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा।

पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वित कार्रवाई पर जोर

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ से लगी मध्यप्रदेश की सीमाओं को देखते हुए अपराधियों की अंतरराज्यीय आवाजाही, हथियारों की तस्करी और ड्रग्स कॉरिडोर पर पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने बेहतर आसूचना साझा करने, नेटग्रिड के प्रभावी उपयोग, उच्च शिक्षण संस्थानों में ड्रग-मुक्त कैंपस फ्रेमवर्क लागू करने और एनडीपीएस विशेष न्यायालयों की शीघ्र स्थापना पर जोर दिया। राज्य में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन की दिशा में भी काम करने को कहा गया।

17 गुप्त ड्रग लैब का भंडाफोड़

बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने ड्रग्स बनाने वाली 17 गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। आदतन ड्रग अपराधियों के खिलाफ पीआईटीएनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई तेज की गई है। ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान में इस वर्ष 58 करोड़ सोशल मीडिया व्यूज मिले, जबकि 2 करोड़ 47 लाख नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी रही। सरकार का फोकस नशे के नेटवर्क के साथ-साथ युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों को नशे से दूर रखने पर भी है।

साइबर अपराध पर भी सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को कानून-व्यवस्था के साथ सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र (एस4सी) और ई-साक्ष्य के उपयोग की भी समीक्षा हुई। ई-साक्ष्य का कवरेज पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया है। सभी जिलों में 57 मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं। ‘सेफ क्लिक अभियान 2’ के जरिए डिजिटल अरेस्ट को रोकने के प्रयासों की भी जानकारी दी गई।

दो साल में 16,895 पदों पर भर्ती

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 16,895 पदों पर भर्ती की गई है। वर्ष 2026 में 9,662 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। पुलिस बैंड में लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू कर 648 कर्मियों की भर्ती की गई है। प्रदेश में करीब 10 वर्षों से लंबित प्रमोशन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है और विभिन्न संवर्गों में 27 हजार से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। ई-एचआरएमएस में एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों को जोड़ा गया है।

नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में प्रगति

बैठक में बताया गया कि तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश में 90 दिनों के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने की दर 69 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 59 प्रतिशत से अधिक है। ई-समन की सीधी डिलीवरी में मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे बताया गया। बैठक में कानून-व्यवस्था, मादक पदार्थ नियंत्रण, साइबर अपराध, आतंकवाद प्रतिरोध, भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस आधुनिकीकरण और पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय जैसे विषयों की भी समीक्षा की गई।

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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से नक्सल समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है। अब नक्सल मुक्त क्षेत्रों के विकास के लिए 400 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। युवाओं में विश्वास जगाने के लिए वर्ष 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने, सांदीपनि विद्यालयों के जरिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनजातीय क्षेत्रों में भरोसा बढ़ाने के लिए धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।

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