

Irrigation Project For 6 Lakh Hectare Land: मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के कृषि परिदृश्य को बदलने का बड़ा निर्णय लिया है।
'कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत प्रदेश के 13 जिलों में पूर्ण हो चुकी विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के लोकार्पण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आगामी 6 महीनों में इन परियोजनाओं के शुरू होने से लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।
मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभागों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जानकारी दी कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खण्डवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मण्डला जिलों के किसानों को इन नई परियोजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक का एक प्रमुख आकर्षण 'स्लीमनाबाद टनल' रही। नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण टनल बरगी व्यपवर्तन परियोजना का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ने आगामी सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की। शिप्रा तट पर 29 किलोमीटर लंबी घाट निर्माण परियोजना में 60% प्रगति दर्ज की गई है। वहीं, केन-बेतवा लिंक परियोजना पर चर्चा करते हुए बताया गया कि बुंदेलखंड के 10 जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर सिंचाई और 130 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेज दिया गया है, जिसकी अनुमानित लागत 8400 करोड़ रुपये है।
मध्य प्रदेश के सिंचाई रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान और निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूरा होने पर प्रदेश का सिंचित क्षेत्र बढ़कर 95.45 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। यदि अन्य स्वीकृत परियोजनाओं को भी शामिल किया जाए, तो यह आंकड़ा 108 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। गत ढाई वर्षों में ही राज्य ने 10 लाख हेक्टेयर के सिंचित क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया है।