MP सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी दस्तावेजों में अब 'क्षिप्रा' नहीं, 'शिप्रा' लिखा जाएगा, CM के निर्देश पर बदलाव

MP Government News: सरकार ने दस्तावेजों में 'क्षिप्रा' की जगह 'शिप्रा' लिखने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐतिहासिक और साहित्यिक प्रमाणों के आधार पर यह बदलाव कराया है।
Chief Minister Dr. Mohan Yadav defended the Uniform Civil Code (UCC), stating that if the RSS agenda is nationalist, it would be implemented repeatedly, intensifying the political debate in Madhya Pradesh
मुख्यमंत्री मोहन यादव (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

Shipra River Name Change: मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन की पवित्र नदी के नाम को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। अब राज्य सरकार के सभी सरकारी दस्तावेजों, प्रोजेक्ट फाइलों और आधिकारिक पत्राचार में नदी का नाम 'क्षिप्रा' के बजाय 'शिप्रा' लिखा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद यह बदलाव लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय ऐतिहासिक, साहित्यिक और वैदिक प्रमाणों के आधार पर लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की समीक्षा बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए प्रेजेंटेशन में नदी का नाम 'क्षिप्रा' लिखा गया था। इसे देखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल आपत्ति जताई और अधिकारियों से नाम की व्युत्पत्ति तथा ऐतिहासिक प्रमाणों की जांच करने के निर्देश दिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की दोबारा जांच

अधिकारियों ने प्रारंभिक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता ली। शुरुआत में एआई ने 'क्षिप्र' शब्द के आधार पर 'क्षिप्रा' को सही बताया। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन की शिप्रा नदी अपनी शांत और मंथर धारा के लिए जानी जाती है, इसलिए इसकी ऐतिहासिक और साहित्यिक पृष्ठभूमि की दोबारा जांच की जानी चाहिए।

यजुर्वेद के आधार पर अध्ययन

इसके बाद कालिदास के ग्रंथों और यजुर्वेद सहित प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर दोबारा अध्ययन किया गया। इस समीक्षा में 'शिप्रा' नाम को ही सही माना गया। बैठक में बताया गया कि यजुर्वेद में नदी का उल्लेख 'शिप्रे: अवे: पत्र:' के रूप में मिलता है। वहीं महाकवि कालिदास ने रघुवंश में 'शिप्रातरंगानिलकम्पि तासु' तथा मेघदूत में 'शिप्रावात: प्रियतम इवं प्रार्थनाचाटुकार:' लिखकर इस नदी का उल्लेख 'शिप्रा' नाम से किया है।

शिप्रा शब्द का उपयोग करने के निर्देश

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार के सभी विभागों को आधिकारिक रिकॉर्ड, प्रोजेक्ट दस्तावेजों और सिंहस्थ से संबंधित कार्यों में 'शिप्रा' शब्द का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नर्मदा घाटी से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों की भी समीक्षा की तथा अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत के अनुरूप सही नाम को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Navbharat Live
navbharatlive.com