MP के सरकारी स्कूलों में कछुआ चाल: आधा सत्र बीतने के बाद दिसंबर तक मिल पाएगी 55 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म
MP Education News: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मुफ्त यूनिफॉर्म वितरण में भारी देरी, टेंडर प्रक्रिया के फेर में फंसा 55 लाख बच्चों का ड्रेस प्रोजेक्ट, दिसंबर तक उम्मीद।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: सजल रघुवंशी
कॉन्सेप्ट इमेज (सोर्स- सोशल मीडिया)
MP Government School Uniform Delay: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र का आगाज तो हो चुका है, लेकिन पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए इस साल भी समय पर स्कूल ड्रेस मिलना मुहाल नजर आ रहा है।
कैबिनेट स्तर पर स्कूली बच्चों को नि:शुल्क यूनिफॉर्म देने की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बावजूद, जमीनी स्तर पर सुस्त प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण अब यह साफ हो चुका है कि आधा सत्र बीत जाने के बाद यानी दिसंबर तक ही बच्चों के हाथों में यूनिफॉर्म पहुंच सकेगी। प्रदेश के करीब 55 लाख विद्यार्थियों से जुड़े इस बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी का जिम्मा राज्य शिक्षा केंद्र (RSK) के पास है, जबकि निविदा (टेंडर) की पूरी जिम्मेदारी पाठ्यपुस्तक निगम को सौंपी गई है।
टेंडर प्रक्रिया में लगेंगे 4 महीने
पाठ्यपुस्तक निगम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल यूनिफॉर्म सप्लाई के लिए निविदा का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार किया जा रहा है। इस प्रारूप को ही अंतिम रूप देकर जारी करने में करीब एक महीने का समय लग जाएगा। इसके बाद खुली निविदा के जरिए कंपनियों का चयन करने, दरें तय करने और कपड़ों के निर्माण व सप्लाई में 3 से 4 महीने का अतिरिक्त समय लगना तय है। खुद विभागीय अफसर भी मान रहे हैं कि दिसंबर से पहले बच्चों तक ड्रेस पहुंचाना संभव नहीं है।
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इन 5 बड़े नीतिगत फैसलों पर असमंजस बरकरार
यूनिफॉर्म वितरण की राह में केवल टेंडर की देरी ही रोड़ा नहीं है, बल्कि सरकार स्तर पर अभी कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले होने बाकी हैं।
- वितरण का मॉडल: क्या जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जिला स्तर पर विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत कपड़े बंटवाएंगे या फिर भोपाल मुख्यालय से सीधे ब्लॉकों में केंद्रीकृत सप्लाई होगी?
- साइज का संकट: बच्चों के कपड़ों की सही नाप लेने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी या फिर रेडीमेड साइज चार्ट के भरोसे काम होगा?
- बजट पर सस्पेंस: बढ़ती महंगाई को देखते हुए प्रति विद्यार्थी दो जोड़ी यूनिफॉर्म के लिए अंतिम स्वीकृत बजट राशि की सटीक घोषणा होना अभी बाकी है।
- रंग और पैटर्न: क्या इस सत्र से स्कूल यूनिफॉर्म के पारंपरिक रंग और डिजाइन में कोई बदलाव किया जा रहा है या पुराना प्रारूप ही रहेगा, इस पर अंतिम मंजूरी लंबित है।
- कोई डेडलाइन नहीं: इन सभी उलझनों के बीच बच्चों तक ड्रेस पहुंचने की कोई आधिकारिक अंतिम तिथि (डेडलाइन) जारी नहीं की गई है।
10 साल में बदले कई प्रयोग, पर समय पर कभी नहीं मिली ड्रेस
अगर पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो सरकार ने यूनिफॉर्म बांटने के कई तरीके (मॉडल) बदले, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। हर साल सत्र शुरू होने के 4 से 5 महीने बाद ही बच्चों को ड्रेस नसीब हुई सत्र 2016-17 से 2018-19 शाला प्रबंधन समितियों (SMC) को जिम्मेदारी दी गई, जिन्होंने स्थानीय दर्जियों से कपड़े सिलवाकर बांटे।
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फिर बाद में सत्र 2019-20 सरकार ने महिला स्व-सहायता समूहों (SHGS) को काम सौंप दिया। सत्र 2020-21 और 2021-22 यानी कोविड काल के दौरान कपड़ों के बजाय सीधे छात्र या अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी (डीबीटी) के जरिए नकद राशि भेजी गई। सत्र 2022-23 से 2024-25: सरकार ने दोबारा महिला स्व-सहायता समूहों पर भरोसा जताया, लेकिन हर बार वितरण में भारी देरी हुई।
