MP के किसान पर फूटा KCC का 'ब्याज बम'! मात्र 5 हजार की चूक और लग गया 12 हजार का फटका; क्या सरकार देगी राहत?

Madhya Pradesh: सहकारिता व्यवस्था और गेहूं खरीदी की समयसीमा की वजह से किसानों को हो रही परेशानी खुलकर सामने आने लगी है। इन मामलों को लेकर आवाज तेज हो गई है और सरकार से समाधान की उम्मीद भी बढ़ गई है।
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प्रतीकात्म इमेज (सोर्स- एआई जनरेटेड)
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Madhya Pradesh Kisan Loan Default Issues: मध्य प्रदेश में सहकारिता व्यवस्था और गेहूं खरीदी की समयसीमा के कारण किसानों को हो रही परेशानी अब खुलकर सामने आने लगी है। राहत की बात यह है कि इन मामलों को लेकर आवाज तेज हो गई है और सरकार से समाधान की उम्मीद भी बढ़ गई है।

राजधानी भोपाल के बैरसिया क्षेत्र के किसान ओमप्रकाश शर्मा का मामला इस दिशा में एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने सहकारी समिति से लिया गया कर्ज समय पर चुकाने की कोशिश की लेकिन तकनीकी कारणों से उन पर अपेक्षा से अधिक ब्याज जोड़ दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

किसान ओमप्रकाश शर्मा ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत करीब 2 लाख रुपए का ऋण लिया था। उन्होंने निर्धारित समय के आसपास भुगतान भी कर दिया, लेकिन एक वाउचर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण 5 हजार रुपए पर 12,194 रुपए तक ब्याज जोड़ दिया गया। किसान का कहना है कि पैसा खाते में मौजूद होने के बावजूद केवल तकनीकी कमी के चलते इतना बड़ा ब्याज लगना गलत है।

गेहूं खरीदी में देरी बनी बड़ी वजह

इस पूरे विवाद की जड़ में गेहूं खरीदी की देरी भी बताई जा रही है। ऋण चुकाने की अंतिम तारीख 31 मार्च थी और गेहूं खरीदी शुरू की तारीख 9 अप्रैल, ऐसे में किसानों का कहना है कि जब फसल की बिक्री ही शुरू नहीं हुई थी, तो वे समय पर पैसा कैसे जमा करते।

किसानों की बढ़ती आवाज

मध्य प्रदेश में कई किसान इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में किसान तकनीकी कारणों और समयसीमा के चलते डिफॉल्टर की स्थिति में पहुंच गए हैं। कांग्रेस सेवादल के सत्याग्रह के जरिए भी यह मुद्दा उठाया गया है, जिससे प्रशासन का ध्यान इस ओर गया है।

क्या मिल सकती है राहत?

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी खामियों की समीक्षा हो सकती है, ब्याज में राहत या माफी पर विचार संभव है, खरीदी और ऋण भुगतान की तारीखों में समन्वय लाया जा सकता है। यह मामला केवल एक किसान तक सीमित नहीं है बल्कि प्रदेश के हजारों किसानों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। अच्छी बात यह है कि अब यह समस्या सामने आ चुकी है और समाधान की दिशा में पहल की उम्मीद भी बढ़ गई है।

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