

Bhopal Political News: मध्य प्रदेश में भले ही सरकार की और 2 आयोग के अध्यक्षों के नाम का एलान कर दिया हो पर दावेदारों के बीच खींचतान के कारण फिलहाल निगम मंडल के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के नाम अटक गए है! मध्य प्रदेश बीजेपी में पहली बार ऐसा हो रहा है कि संगठन की बजाय नेता खुद संगठन को अपनी पसंद का निगम मंडल बता रहे है। इसके कारण शीर्ष नेतृत्व असमजंस है ।
बता दें कि दावेदारों में कई सीनियर नेता है जनिके चलते बीजेपी संगठन के मुखिया खुद तय नहीं कर पा रहे क्या करे! बीजेपी कई नेता अपनी पसंद से पदों की मांग कर रहे है । दावेदार ज्यादा हैं, इसलिए संतुलन बनाना मुश्किल होरहा है जातीय, क्षेत्रीय और गुटीय समीकरणों के हिसाब से संतुलन बनाना भी मुश्किल है ।
निगम मंडल के दावेदारों सीनियर नेता निगम मंडल चाहते है। निगम मंडल के बारे में बताया गया तो संगठन की पसंद से पहले उन्होंने अपनी पसंद के निगम मंडल बता दिए जिसके कारण मामला होल्ड पर चला गया । ऐसे नेताओ के लिए बीजेपी संगठन ने दिल्ली के ऊपर निर्णय छोड़ दिया है ।
नेताओ की डिमांड के बीच बीजेपी प्रदेश नेतृत्व ने उन नेताओ को पद बांटने शुरू जिन्होंने डिमांड नहीं की और संयम दिखया।जो नेता सार्वजनिक रूप से दबाव नहीं बना रहे, संगठन के प्रति संयम दिखा रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है।हाल ही में जारी आयोग की सूची में कई ऐसे नाम सामने आए जिनकी चर्चा पहले ज्यादा नहीं थी लेकिन उन्हें मंत्री दर्जा या महत्वपूर्ण पद देकर “एडजस्ट” किया गया। यानी “शांत रहो, समय आने पर इनाम मिलेगा” वाला संकेत। इसके पीछे की रणनीति है डिमांड पॉलिटिक्स पर कंट्रोल।अगर सिर्फ मांग करने वालों को पद मिलेंगे, तो हर कोई दबाव बनाएगा।इसलिए नेतृत्व यह मैसेज दे रहा है कि “डिमांड नहीं, डिसिप्लिन मायने रखता है।”
बीजीपी में इस समय बड़े नेताओ के अलग-अलग गुट हैं। हर गुट चाहता है कि उसके समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा जगह मिले, जिससे सूची फाइनल करने में देरी हो रही है।माना जा रहा है शिवराज सिंह चौहान , ज्योतिरादित्य सिंधिया , कैलाश विजयवर्गीय , प्रहलाद पटेल जैसे नेता अपने समर्थको के लिए ज्यादा से ज्यादा कोटा चाहते है।
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती कई दावेदारों को लेकर है। इसलिए भी चुनाव में देरी हुई।लंबी फेहरिस्त उन सीनियर विधायकों की है जो मंत्री पद की आस लिए दो साल गुजार चुके हैं। लिहाजा मजबूत दावेदारी के साथ ये भी एक कतार है। उधर 2023 के चुनाव में अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा चुके वे नेता जो संगठन में एडजस्ट नहीं हो पाए अब निगम मंडल की उम्मीद लगाए हैं कि पार्टी यहां तो मौका देगी।