MP में बिजली की कमी! मांग पूरी करने गुजरात-पंजाब से खरीदी जा रही अतिरिक्त बिजली, CM मोहन यादव ने दी जानकारी

MP Power Crisis: मध्य प्रदेश में गहराया बिजली संकट, 15 हजार मेगावाट मांग के सामने 2-3 हजार मेगावाट की कमी। गुजरात-पंजाब से मदद के बावजूद ग्रामीण इलाकों में कटौती।
Madhya Pradesh purchases additional electricity from Gujarat and Punjab to meet demand
सीएम मोहन यादव ने बिजली को लेकर दी अहम जानकारी(सोर्स- सोशल मीडिया)
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HIGHLIGHTS:

  • MP में बिजली की मांग 15 हजार मेगावाट, उत्पादन 12-13 हजार मेगावाट के बीच।

  • गुजरात और पंजाब से ली जा रही बिजली, गांवों में 2-5 घंटे कटौती।

  • कम बारिश और सिंचाई के लिए पलेवा से बढ़ी बिजली की खपत, सप्लाई पर दबाव।

  • जीतू पटवारी ने सरकार से पूछा- सरप्लस बिजली कहां है?

Madhya Pradesh Electricity Shortage: मध्य प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर के चलते सप्लाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। प्रदेश में एक दिन में करीब 15 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत है, जबकि वर्तमान उत्पादन 12 से 13 हजार मेगावाट के आसपास बताया जा रहा है। ऐसे में 2 से 3 हजार मेगावाट बिजली की अतिरिक्त जरूरत पड़ रही है।

मांग पूरी करने के लिए सरकार गुजरात और पंजाब से भी बिजली ले रही है। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में 2 से 5 घंटे तक बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक में बिजली की स्थिति और मांग बढ़ने के कारणों की जानकारी दी। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

MP में 15 हजार मेगावाट बिजली की मांग, उत्पादन कम

प्रदेश में बिजली की खपत बढ़ने से आपूर्ति और मांग के बीच अंतर पैदा हो गया है। जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश में प्रतिदिन करीब 15 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता है, जबकि उत्पादन 12 से 13 हजार मेगावाट के बीच है। इस कारण प्रतिदिन 2 से 3 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ रही है। मांग और उपलब्धता के इस अंतर को पूरा करने के लिए दूसरे राज्यों से बिजली ली जा रही है। हालांकि, बढ़ी हुई मांग के चलते कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

गुजरात और पंजाब से ली जा रही बिजली

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश की जरूरत पूरी करने के लिए गुजरात और पंजाब से बिजली ली जा रही है। बिजली कंपनियों ने खपत को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में कटौती का फैसला किया है। ग्रामीण इलाकों में कुछ स्थानों पर 2 से 5 घंटे तक बिजली नहीं मिलने की स्थिति सामने आई है। इससे किसानों और आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, कटौती की अवधि अलग-अलग क्षेत्रों में मांग और उपलब्ध आपूर्ति के आधार पर बदल सकती है।

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कम बारिश और पलेवा से बढ़ी बिजली की मांग

बिजली की मांग अचानक बढ़ने के पीछे खेती से जुड़ी जरूरतों को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। निमाड़ क्षेत्र में इस बार कम बारिश होने के कारण किसानों ने खेतों में पलेवा पहले शुरू कर दिया। वहीं, भोपाल संभाग समेत प्रदेश के अन्य जिलों में धान की फसल के लिए आखिरी पानी की जरूरत बनी हुई है। सिंचाई के लिए पंपों का अधिक इस्तेमाल होने से बिजली की खपत बढ़ गई है। इसके अलावा बोवनी में देरी और कृषि गतिविधियों के अलग-अलग चरणों ने भी मांग पर असर डाला है।

जीतू पटवारी ने सरकार से पूछा- सरप्लस बिजली कहां है?

बिजली संकट को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार जिस सरप्लस बिजली की उपलब्धता का दावा करती है, वह मेट्रो को दी जाने वाली अतिरिक्त बिजली आखिर कहां है? बिजली कटौती के बीच विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम करने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को कब तक राहत मिलती है।

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