मोहन कैबिनेट ने UCC विधेयक 2026 को दी मंजूरी, मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में होगा पेश

Mohan Yadav Cabinet Meeting : मोहन कैबिनेट ने UCC विधेयक-2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि विधेयक 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।
Madhya Pradesh UCC Bill
मोहन कैबिनेट (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Madhya Pradesh UCC Bill: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा निर्णय लिया है। रविवार को जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट की बैठक में 'यूसीसी विधेयक-2026' के मसौदे को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है।

कैबिनेट द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद, अब इस बहुप्रतीक्षित विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान सदन के पटल पर पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि सरकार ने इस विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने की पूरी तैयारी कर ली है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय को एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए सभी मंत्रिमंडल सहयोगियों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों में समानता हमेशा से एक अभिन्न अंग रही है और इसी भावना के अनुरूप सरकार ने यह निर्णय लिया है। विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद उस पर विस्तृत चर्चा होगी और सदन की मंजूरी मिलते ही इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सीएम ने याद किया भोपाल का गौरवशाली इतिहास

कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला

  • परमार राजवंश और राजा भोज: मुख्यमंत्री ने बताया कि भोपाल का इतिहास परमार राजवंश से गहराई से जुड़ा है। राजा भोज के संरक्षण में यह क्षेत्र उत्तर भारत से लेकर मालवा तक सनातन संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र रहा है।
  • गोंड साम्राज्य का योगदान: उन्होंने गोंड शासकों, विशेषकर मदन शाह और संग्राम शाह के योगदान को याद किया। उन्होंने राजा निजाम शाह की दुखद मृत्यु और रानी कमलापति द्वारा अपने पुत्र व प्रजा की रक्षा के लिए दिखाए गए अदम्य साहस का भी उल्लेख किया।
  • विकास का सफर: मुख्यमंत्री ने भोपाल के इतिहास में अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान के शासनकाल और बाद की परिस्थितियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सिंधिया शासन के लगभग 11 वर्षों के बाद राजधानी का भोपाल स्थानांतरण इस क्षेत्र के लिए एक नए युग की शुरुआत थी।
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