आम जनता को फिर लग सकता है महंगाई का झटका: बस किराया बढ़ाने की तैयारी, अगले हफ्ते होगी अहम बैठक

Madhya Pradesh Transport News: एमपी में बस किराया बढ़ाने की तैयारी चल रही है। बस ऑपरेटरों की मांग के बाद किराया निर्धारण समिति की बैठक अगले सप्ताह होगी, जिसमें नया किराया ढांचा तय किया जा सकता है।
MP Bus Fare Hike
बस (फोटो सोर्स- नवभारत)
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MP Bus Fare Hike : मध्य प्रदेश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है। आगामी सप्ताह में सार्वजनिक बसों के किराए में बढ़ोतरी को लेकर महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। परिवहन विभाग ने “किराया निर्धारण समिति” की बैठक बुलाने की तैयारी कर ली है, जिसमें नए किराया ढांचे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, लंबे समय से घाटे और लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का हवाला दे रहे बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। इस बार बैठक में बस ऑपरेटरों के दो प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जा रहा है, जिससे माना जा रहा है कि किराया बढ़ोतरी की संभावना और अधिक मजबूत हो गई है। हालांकि विभाग इसे “संतुलित और व्यावहारिक निर्णय” बता रहा है, लेकिन आम यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

बैठक में शामिल होंगे ये अधिकारी

साल 2010 में गठित इस स्थायी समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारी शामिल हैं, जो बस किराया तय करने पर अंतिम निर्णय लेते हैं। प्रस्तावित बैठक में प्रमुख सचिव (परिवहन), आर्थिक सलाहकार (वित्त), आयुक्त (वाणिज्यिक कर), परिवहन आयुक्त, भोपाल संभाग आयुक्त और राज्य परिवहन उपक्रम के प्रबंध संचालक जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे। इसके अलावा परिवहन आयुक्त द्वारा नामांकित दो बस ऑपरेटर प्रतिनिधि भी बैठक में मौजूद रहेंगे, जो अपनी राय और सुझाव देंगे।

किराया बढ़ना लगभग तय

सूत्रों के अनुसार, ईंधन लागत और परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए किराया संशोधन लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय समिति की सहमति के बाद ही लागू होगा। यदि बस किराया बढ़ता है तो इसका सीधा असर उन मध्यम और निम्न आय वर्ग के यात्रियों पर पड़ेगा, जो रोजाना निजी या सार्वजनिक बसों से यात्रा करते हैं। इससे उनके मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।

न्यूनतम वृद्धि की कोशिश

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रयास किया जाएगा कि किराया वृद्धि न्यूनतम रखी जाए, ताकि यात्रियों और बस ऑपरेटरों दोनों के हितों में संतुलन बना रहे। अब सभी की नजरें अगले हफ्ते होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि आम जनता की जेब पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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