Highlights :
मध्यप्रदेश 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आया था।
वर्ष 2026 में राज्य अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रहा है।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत मध्यप्रदेश का गठन हुआ।
भोपाल को नए राज्य की राजधानी बनाया गया।
MP Foundation Day History 70 Years : मध्यप्रदेश 1 नवंबर को अपना स्थापना दिवस मना रहा है। 1956 में आज के दिन देश के राज्यों के पुनर्गठन के बाद मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया था। इस साल राज्य अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रहा है। 'भारत का हृदय' कहे जाने वाले मध्यप्रदेश का ये दिन उसकी ऐतिहासिक यात्रा, सांस्कृतिक विरासत और साझा पहचान का प्रतीक है।
स्थापना दिवस पर प्रदेशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न आयोजनों के जरिए राज्य की परंपराओं और उपलब्धियों को याद किया जाता है।
आजादी के बाद देश में राज्यों की सीमाओं के पुनर्गठन की मांग तेज हुई। प्रशासनिक व्यवस्था के साथ भाषाई आधार पर राज्यों के गठन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इसके बाद राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 लागू किया गया। इसी अधिनियम के तहत 1 नवंबर 1956 को एमपी यानी मध्यप्रदेश का गठन हुआ। इसमें मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्य सहित तत्कालीन मध्यप्रदेश के क्षेत्रों को मिलाकर नया राज्य बनाया गया।
देश के मध्य भाग में स्थित होने के कारण इस राज्य का नाम मध्यप्रदेश रखा गया। गठन के समय भोपाल को इसकी राजधानी बनाया गया। इसके बाद भोपाल राज्य के प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों का प्रमुख केंद्र बना। स्थापना के साथ ही नए राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था आधारभूत ढांचे और विकास की दिशा तय होने लगी।
मध्यप्रदेश के इतिहास में 1 नवंबर 2000 भी एक महत्वपूर्ण तारीख है। इसी दिन तत्कालीन मध्यप्रदेश के दक्षिण पूर्वी हिस्से को अलग कर छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया। इसके बाद मध्यप्रदेश का भौगोलिक स्वरूप बदल गया। अलग राज्य बनने के बावजूद मध्यप्रदेश ने कृषि, उद्योग, आधारभूत ढांचे और शिक्षा सहित कई क्षेत्रों में विकास की यात्रा जारी रखी।
मध्यप्रदेश की पहचान उसकी विविध लोकसंस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और परंपराओं से भी है। स्थापना दिवस पर प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में लोकनृत्य, संगीत कार्यक्रम, कला प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य की जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और ऐतिहासिक विरासत को सामने लाया जाता है।
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस केवल राज्य के गठन की तारीख नहीं, बल्कि यहां के लोगों की साझा पहचान और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव भी है। ये दिन प्रदेश की अब तक की विकास यात्रा को याद करने और भविष्य की संभावनाओं पर विचार करने का अवसर देता है। आज एमपी में 55 जिले, 230 विधानसभा सीटें और 29 लोकसभा की सीटें हैं। 70 साल की इस यात्रा में मध्यप्रदेश ने कई बदलाव देखे हैं और देश के सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक विकास में अपनी भूमिका निभाई है।