

Ten Crore Tender Fraud MP: मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में करीब 10 करोड़ रुपये के कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की खरीदी से जुड़े कथित टेंडर फर्जीवाड़े का मामला अब चर्चा का केंद्र बन गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा मुख्य आरोपी रणधीर पटेल समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है।
हालांकि अब सवाल केवल कथित फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एफआईआर के बाद की कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी उठ रहे हैं।
जांच में आरोप सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किया गया। EOW जांच में कुछ फर्मों के मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और पते में समानता मिलने की बात कही गई है। आरोप है कि इन फर्मों के माध्यम से प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार कर सरकारी टेंडर हासिल किया गया। इसके अलावा सरकार को बाजार दर से अधिक कीमत पर कंप्यूटर और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने तथा कुछ उपकरणों में स्थानीय या कथित तौर पर फर्जी पार्ट्स इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह माना जा रहा है कि कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कुछ उपकरणों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन कर दिया गया था। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी खरीद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना किसके निर्देश पर हुई और इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई।
मामले को लेकर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा है कि जांच पूरी हो चुकी है और मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संज्ञान में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि गिरफ्तारी, संपत्ति कुर्की और सरकारी नुकसान की भरपाई जैसे सवालों पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इससे कार्रवाई की दिशा को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इस पूरे मामले में अब विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। सवाल उठ रहे हैं कि टेंडर दस्तावेजों का सत्यापन किसने किया, उपकरणों की गुणवत्ता और कीमत की जांच किस स्तर पर हुई तथा सप्लाई और इंस्टॉलेशन को मंजूरी किस अधिकारी ने दी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि यदि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है तो उसकी भरपाई कैसे होगी। फिलहाल EOW की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।