HC से विधानसभा पहुंचा मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव में पर्चा रद्द होने का विवाद, EC से मांगा मार्गदर्शन

MP Rajya Sabha Election : मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने का मामला हाईकोर्ट से विधानसभा पहुंचा। विधानसभा ने CEO और चुनाव आयोग से मार्गदर्शन मांगा, 11 सितंबर से ट्रायल होगा।
Meenakshi Natarajan Rajya Sabha Nomination Dispute
मध्य प्रदेश विधानसभा सोर्स - सोशल मीडिया
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Meenakshi Natarajan Rajya Sabha Nomination Dispute: मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने का विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। विक्रांत भूरिया और मीनाक्षी नटराजन की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच मामला विधानसभा सचिवालय तक पहुंच गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा ने सभी संबंधित पक्षों से जानकारी तलब की है।

विधानसभा ने CEO और चुनाव आयोग से मांगा मार्गदर्शन

याचिका विधानसभा पहुंचने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने मामले को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) और केंद्रीय चुनाव आयोग से मार्गदर्शन मांगा है। अब चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। चुनाव आयोग इस मामले में फिलहाल कानूनी राय लेने की प्रक्रिया में है।

9 जून को रद्द हुआ था मीनाक्षी नटराजन का नामांकन

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हुआ था। तीसरी सीट पर भाजपा की ओर से महेश केवट और कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन उम्मीदवार थीं। चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने 9 जून 2026 को मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया था। नामांकन रद्द करने के पीछे उनके फॉर्म-26 में कथित तौर पर जानकारी अधूरी होने को आधार बनाया गया था।

हैदराबाद कोर्ट के नोटिस की जानकारी नहीं देने का आरोप

रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन ने अक्टूबर 2025 में हैदराबाद की एक अदालत से जारी नोटिस की जानकारी अपने फॉर्म-26 में नहीं दी थी। इसे अदालती कार्यवाही से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने के रूप में देखा गया। इसी आधार पर उनका नामांकन निरस्त किया गया था। हालांकि, नटराजन की ओर से इस आधार पर आपत्ति जताई गई है।

मीनाक्षी का तर्क- कोर्ट का नोटिस कोई मुकदमा नहीं

नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत हाईकोर्ट का रुख किया। उनका तर्क है कि जिस नोटिस को नामांकन रद्द करने का आधार बनाया गया, वह कोई औपचारिक मुकदमा नहीं था। ऐसे में उसे फॉर्म-26 में छिपाए गए तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अब हाईकोर्ट में इसी समेत अन्य कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर सुनवाई होगी।

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11 सितंबर से शुरू होगा ट्रायल

मामले में हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों से संबंधित जानकारी तलब की है और 11 सितंबर से ट्रायल शुरू होने की बात सामने आई है। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा के अनुसार, मामला अब सिविल केस की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है। ट्रायल के दौरान सभी पक्षों को अपने-अपने तथ्य और दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होंगी। ऐसे में मामले के जल्द समाप्त होने की संभावना कम मानी जा रही है।

तीन पक्षकारों को देना होगा अपना जवाब

इस मामले में रिटर्निंग ऑफिसर, मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और केंद्रीय चुनाव आयोग प्रमुख पक्षकार हैं। तीनों को अदालत के समक्ष अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव से जुड़ा यह महत्वपूर्ण मामला है, जिसकी सुनवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत हो रही है। अब विधानसभा, निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव आयोग की ओर से मिलने वाले जवाब के साथ हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।

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