

MP में फर्जी भारतीय पासपोर्ट रैकेट की जांच तेज।
STF ने 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया और 7 गिरफ्तारियां हुईं।
70 से ज्यादा संदिग्ध पासपोर्ट से 120 से अधिक विदेश यात्राओं का खुलासा।
डबरा, भोपाल और बैतूल के बौद्ध मठों-विहारों के पते पर बने संदिग्ध पासपोर्ट।
Bangladeshi Nationals Obtained Indian Passports: मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट दिलाने वाले रैकेट की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अब तक 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया है, जबकि मामले में सात आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। जांच में 70 से अधिक संदिग्ध पासपोर्ट के जरिए 120 से ज्यादा विदेश यात्राएं किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब एजेंसी यह पता लगा रही है कि इन पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विदेश जाने वाले कितने लोग भारत लौटे और कितने वापस नहीं आए। जांच का दायरा अब एजेंटों और कथित सरगनाओं से आगे बढ़कर पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों तक पहुंच गया है।
STF की जांच में अब तक 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया गया है। इनमें कथित नेटवर्क के सरगना, एजेंट, फर्जी दस्तावेजों पर गवाह बनने वाले और सत्यापन में भूमिका निभाने के संदेह वाले लोग शामिल हैं। मामले में अब तक सात गिरफ्तारियां हुई हैं। करीब सवा महीने से चल रही जांच में लगभग 50 अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट जारी होने तक किन लोगों ने मदद की।
जांच में फर्जी पते, पहचान और सत्यापन दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। संदिग्ध पासपोर्ट पर डबरा, भोपाल और बैतूल जिले के बौद्ध मठों एवं विहारों के पते दर्ज होने की जानकारी मिली है। STF अब यह जांच रही है कि इन पतों का इस्तेमाल किसकी मदद से किया गया और संबंधित लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी। जांच का उद्देश्य पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और इसमें शामिल लोगों की पहचान करना है।
स्पेशल टास्क फोर्स के मुताबिक, पांच साल के दौरान 70 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों के लिए कथित तौर पर फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट बनवाए गए। इन दस्तावेजों के जरिए 120 से ज्यादा विदेश यात्राएं किए जाने का दावा है। एजेंसी ने पासपोर्ट कार्यालय से संबंधित लोगों का यात्रा रिकॉर्ड मांगा है। शुरुआती जानकारी में चीन, थाईलैंड, मलेशिया और जापान जैसे देशों की यात्राओं का जिक्र है। अब रिकॉर्ड का मिलान कर यात्रियों की आवाजाही का पता लगाया जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित रैकेट भारतीय पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय उपयोगिता का फायदा उठाना चाहता था। पूछताछ में रियाल चौधरी के हवाले से इसकी अच्छी रैंकिंग और कई देशों में वीजा संबंधी सुविधाओं को मांग की वजह बताया गया है। अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि विदेश यात्रा करने वालों में कितने वापस लौटे और कितने विदेश में रह गए। इस जांच से फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का खुलासा होने की संभावना है। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और पूरे नेटवर्क से जुड़े दावों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी।