खरगोन दंगा 2022: सभी 11 आरोपी बरी, जयराम रमेश ने बुलडोजर कार्रवाई पर उठाए कड़े सवाल; मुआवजे की मांग

Jairam Ramesh Statement: खरगोन दंगे में 11 आरोपी बरी होने पर मध्य प्रदेश में सियासत तेज, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रशासन के बुलडोजर कार्रवाई पर उठाए सवाल।
All 11 accused acquitted in Khargone riot 2022 case
जयराम रमेश ने खरगोन बुलडोजर एक्शन पर उठाए सवाल(सोर्स- नवभारत लाइव डिजाइन)
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Jairam Ramesh Questions Bulldozer Action Khargone Riot: साल 2022 के चर्चित खरगोन दंगा मामले में सत्र न्यायालय द्वारा सभी 11 मुस्लिम आरोपियों को बरी किए जाने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इस फैसले का हवाला देते हुए राज्य सरकार की तत्कालीन बुलडोजर कार्रवाई पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को कानून के शासन और संविधान का घोर अपमान करार दिया है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अप्रैल 2022 में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने बिना किसी तय कानूनी प्रक्रिया के पांच मुस्लिम बहुल इलाकों में 16 मकानों और 29 दुकानों को ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था— “जिस घर से पत्थर आए हैं, उस घर को ही पत्थरों का ढेर बनाएंगे।”

मनमानी थी प्रशासन की कार्रवाई- कांग्रेस नेता जयराम रमेश

जयराम रमेश ने कहा कि अब जब अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में सभी आरोपियों को पूरी तरह निर्दोष साबित कर दिया है, तो यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन की कार्रवाई मनमानी थी। उन्होंने मांग की कि बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित हुए बेगुनाह लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए और इसके लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस पोस्ट को साझा करते हुए जयराम रमेश के रुख का समर्थन किया है।

खरगोन हिंसा की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

यह पूरा मामला अप्रैल 2022 का है, जब रामनवमी पर्व के अवसर पर मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में एक जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान डीजे बजाने और नारेबाजी को लेकर दो पक्षों में कहासुनी शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। शहर के कई हिस्सों में पथराव, आगजनी और उपद्रव फैल गया। उपद्रवियों ने कई दुकानों, मकानों और दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिससे करोड़ों रुपये की संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 175 से अधिक लोगों को नामजद आरोपी बनाया था।

24 घंटे में चला था बुलडोजर, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

हिंसा भड़कने के मात्र 24 घंटे के भीतर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों पर बुलडोजर चला दिया था। पांच मुस्लिम बहुल बस्तियों में स्थित 16 मकानों और 29 दुकानों को ढा दिया गया था।

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बिना किसी कानूनी नोटिस और उचित जांच के की गई इस तोड़फोड़ के खिलाफ अप्रैल 2022 में ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का रुख किया था। याचिका में राज्य सरकारों द्वारा मनमाने ढंग से की जा रही इस तरह की बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने और इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन घोषित करने की मांग की गई थी।

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