

Bhopal Master Plan : भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा शुक्रवार से रोशनपुरा में 31 घंटे के उपवास पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांग भोपाल के नए मास्टर प्लान को जल्द लागू करने की है। आंदोलन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए और सरकार से इस मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
कांग्रेस का दावा है कि भोपाल लंबे समय से नए मास्टर प्लान का इंतजार कर रहा है। कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में भोपाल विकास योजना का ड्राफ्ट तैयार किया गया था। वर्ष 2020 में 2031 के प्रारूप को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी और कांग्रेस नेताओं के मुताबिक 2021 में तैयार योजना को अंतिम रूप देकर लागू किया जाना था। हालांकि सरकार बदलने के बाद भी योजना लागू नहीं हो सकी।
मास्टर प्लान की देरी का असर शहर में जमीन के उपयोग और निर्माण से जुड़े मामलों में दिखाई दे रहा है। आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई और सीलिंग के खिलाफ व्यापारी पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं। अगस्त में कारोबारियों ने रोशनपुरा तक मार्च निकालकर मास्टर प्लान के साथ मिक्स्ड लैंड यूज की मांग उठाई थी। ऐसे में यह मुद्दा अब शहर की दुकानों, मकानों, संपत्तियों के उपयोग, ट्रैफिक और भविष्य के विस्तार से जुड़ गया है।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद भी भोपाल मास्टर प्लान को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ‘रन फॉर मास्टर प्लान’ के जरिए सरकार से पूछा था कि जब उज्जैन के मास्टर प्लान पर काम आगे बढ़ सकता है तो भोपाल की योजना वर्षों से लंबित क्यों है। अब पीसी शर्मा के उपवास के जरिए कांग्रेस ने इस मुद्दे को और धार दी है।
पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह भी पीसी शर्मा के आंदोलन के समर्थन में धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जब सरकार 2047 तक की योजनाओं और महानगरों की बात कर रही है, तो भोपाल का मौजूदा मास्टर प्लान कब लागू होगा। जयवर्धन सिंह पहले भी विधानसभा में मास्टर प्लान की फाइल को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान का हवाला देते हुए पूछा था कि यदि फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी जा चुकी थी तो निर्णय में देरी क्यों हुई।
मास्टर प्लान को लेकर सरकार की ओर से भी जल्द निर्णय के संकेत दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहले कह चुके हैं कि भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान की तैयारी पूरी है और इन्हें जल्द लाया जाएगा। सितंबर की शुरुआत में भी उन्होंने सरकार की गंभीरता बताते हुए मास्टर प्लान जल्द जारी करने की बात कही थी। कांग्रेस अब इसी बयान को आधार बनाकर सवाल उठा रही है कि अगर योजना तैयार है तो उसे लागू करने में और कितना वक्त लगेगा।
पीसी शर्मा का 31 घंटे का उपवास इसी सवाल को केंद्र में रखकर किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि भोपाल के विकास, ट्रैफिक, जमीन के उपयोग और भविष्य के विस्तार के लिए स्पष्ट मास्टर प्लान जरूरी है। अब देखना होगा कि इस आंदोलन के बाद सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। फिलहाल कांग्रेस इस मुद्दे को भोपाल के अगले 20-25 साल के विकास से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रही है।