

Bhopal Master Plan : राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट को लेकर जमीन के उपयोग और निर्माण नियमों पर सवाल उठने लगे हैं। नीलबड़-रातीबड़ रोड के दोनों ओर भूमि उपयोग और निर्माण की अनुमति में अंतर को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।
आरोप है कि केरवा की ओर लो डेंसिटी एरिया में निर्माण की सीमा बढ़ाई गई है, जबकि बड़े तालाब की ओर की जमीन को कृषि भूमि के रूप में रखा गया है। इसी अंतर को लेकर अब बड़े तालाब और उसके कैचमेंट एरिया के संरक्षण का मुद्दा भी उठ रहा है।
भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में नीलबड़-रातीबड़ रोड के दोनों ओर जमीन के लिए अलग प्रावधान होने का दावा किया जा रहा है। केरवा की तरफ लो डेंसिटी एरिया में निर्माण की अनुमति को लेकर नियमों में बदलाव की बात सामने आई है, जबकि दूसरी ओर बड़े तालाब की दिशा में जमीन को कृषि उपयोग में रखने का प्रावधान बताया जा रहा है। इसी को लेकर भूमि मालिकों और स्थानीय स्तर पर नियमों की समानता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
केरवा की ओर पहले 1000 वर्गमीटर जमीन पर 60 वर्गमीटर तक निर्माण की अनुमति होने की बात कही जा रही है। नए ड्राफ्ट में सामान्य स्थिति में यह सीमा 150 वर्गमीटर तक किए जाने और अतिरिक्त शुल्क के साथ 300 वर्गमीटर तक निर्माण की अनुमति का दावा है। इस हिसाब से अधिकतम निर्माण सीमा पुराने प्रावधान की तुलना में पांच गुना तक बढ़ सकती है। इस क्षेत्र में कई फार्म हाउस होने की बात भी कही जा रही है।
ड्राफ्ट को लेकर केवल FAR और निर्माण सीमा ही नहीं, बल्कि कुछ जमीनों को ग्रीन बेल्ट में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच स्थित कुछ जमीनों का भूमि उपयोग बदलकर ग्रीन बेल्ट प्रस्तावित किया गया है। इससे संबंधित जमीन मालिकों के सामने जमीन के उपयोग और उसके संभावित आर्थिक मूल्य को लेकर चिंता पैदा हुई है।
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने मास्टर प्लान की प्रक्रिया में नियमों के समान अनुप्रयोग को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की ओर से कहीं FAR दिया जा रहा है और कहीं छोड़ा जा रहा है। शर्मा ने कहा कि बड़े तालाब और उसके कैचमेंट एरिया के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी खसरे को गलत तरीके से छोड़ा गया है या नियमों में हेरफेर हुई है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट सार्वजनिक हो चुका है और इसके प्रावधानों पर दावे, आपत्तियां और सुझाव लिए जाने हैं। आधिकारिक प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के भूमि उपयोग और निर्माण से जुड़े प्रावधानों पर आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं।