

Highlights:
भोपाल मास्टर प्लान 2026 के ड्राफ्ट के विरोध में बड़ी संख्या में किसान नीलबड़ पहुंचे।
पुलिस-प्रशासन ने किसानों के काफिले को नीलबड़ में रोका, अधिकारियों ने ज्ञापन लिया।
किसानों ने भोपाल तालाब के आसपास कृषि भूमि का लैंडयूज नहीं बदलने की मांग की।
मास्टर प्लान तैयार करने से पहले 66 ग्राम पंचायतों की सहमति लेने की मांग उठाई।
भनोरी–इंटखेड़ी छाप समेत तीन सड़क मार्गों की कनेक्टिविटी और चौड़ाई सुधारने की मांग की गई।
Bhopal Master Plan Farmers Protest : भोपाल मास्टर प्लान 2026 के प्रस्तावित ड्राफ्ट को लेकर किसानों ने विरोध जताया है। अपनी मांगों और आपत्तियों के साथ बड़ी संख्या में किसान एकजुट होकर नीलबड़ पहुंचे। किसानों के जुटने की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मौके पर व्यवस्था की।
किसानों के काफिले को नीलबड़ में ही रोक दिया गया। इसके बाद संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से उनका आवेदन प्राप्त किया। अधिकारियों ने मांगों और आपत्तियों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
किसानों ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक को सौंपे आवेदन में भोपाल तालाब के आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि का भू-उपयोग नहीं बदलने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं। उनके मुताबिक, वर्ष 1995 के भोपाल मास्टर प्लान और वर्ष 2019 के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में उनकी जमीन का भू-उपयोग कृषि दर्ज था।
प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान 2026 में कृषि भूमि का लैंडयूज बदलने की आशंका पर किसानों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। भू-उपयोग में बदलाव होने से उनके परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। किसानों ने जमीन का उपयोग कृषि के रूप में ही बनाए रखने की मांग की है।
किसानों ने मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है। आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2020 में मास्टर प्लान से जुड़ी आपत्तियों के दौरान ग्राम पंचायतों की सहमति लेकर ड्राफ्ट तैयार करने का आश्वासन दिया गया था। किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित मास्टर प्लान 2026 में ग्राम पंचायतों की सहमति नहीं ली गई।
किसानों की मांग है कि भोपाल क्षेत्र की 66 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित कराई जाएं और मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर स्थानीय लोगों की राय ली जाए। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़े फैसलों में वहां रहने वाले लोगों की भागीदारी जरूरी है।
किसानों ने वर्ष 2019 के मास्टर प्लान में प्रस्तावित सड़क मार्गों को लेकर भी मांगें रखीं। इनमें ग्राम पंचायत मुगालिया छाप और आसपास के क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने का मुद्दा शामिल है। किसानों ने भनोरी से इंटखेड़ी छाप तक प्रस्तावित सड़क मार्ग, सिकंदराबाद पंचायत के रसूलिया गोसाईं से मुगालिया छाप की मुख्य सड़क तक संपर्क मार्ग और सालिखेड़ी से मुगालिया छाप आने वाले मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क सुविधा से आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा।
भोपाल में किसानों के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के नीलबड़ पहुंचने पर पुलिस और प्रशासन ने व्यवस्था संभाली और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों का आवेदन लिया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों की मांगों और आपत्तियों को शासन तक पहुंचाकर उन पर विचार कराया जाएगा।
भोपाल मास्टर प्लान 2026 को लेकर किसानों के विरोध में कृषि भूमि का संरक्षण, ग्राम सभाओं की भागीदारी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधाओं का मुद्दा प्रमुख रहा। फिलहाल किसानों की मांगों पर अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं है। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इन आपत्तियों पर क्या कार्रवाई होती है और प्रस्तावित मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में किसानों की मांगों को कितनी जगह मिलती है।