

Ashutosh Tiwari Statement: दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने पहली बार चुनाव परिणाम और संगठनात्मक बदलाव को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। नवभारत लाइव से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी पूरे चुनाव की समीक्षा करेगी। यदि कहीं कोई चूक हुई है तो उसे स्वीकार करते हुए सुधार किया जाएगा। साथ ही उन्होंने भीतरघात और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर भी अपनी बात रखी।
आशुतोष तिवारी ने कहा कि चुनाव परिणाम के बाद आत्ममंथन स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, "अगर कोई चूक हुई है तो उसकी समीक्षा होगी। मैं भी अपने अंतर्मन से विचार करूंगा कि ऐसी कौन-सी बातें रहीं, जिनमें सुधार की आवश्यकता है। साथ ही यह भी सोचेंगे कि कांग्रेस के षड्यंत्रों का मुकाबला कैसे किया जाए और इसमें हम सभी की क्या भूमिका हो सकती है।"
उपचुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा की दतिया जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने के सवाल पर आशुतोष तिवारी ने कहा कि इसे किसी विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह संगठन की सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि इसे दायित्व परिवर्तन के रूप में देखा जाना चाहिए और भविष्य में इन्हीं कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं।
चुनाव के दौरान भीतरघात की चर्चाओं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित वरिष्ठ नेताओं से हुई मुलाकात पर पूछे गए सवाल का भी उन्होंने जवाब दिया। आशुतोष तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनकी मुलाकात केवल शिष्टाचार और आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव में पार्टी का साथ दिया, इसलिए उनसे मिलकर धन्यवाद देना उनका दायित्व था।
पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को लेकर उपचुनाव के दौरान चली राजनीतिक चर्चाओं पर भी आशुतोष तिवारी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "चर्चाएं हैं, चर्चाओं का क्या है, चर्चाएं तो होती रहती हैं। मैं काल्पनिक चर्चाओं पर भरोसा नहीं करता। व्यक्ति को अपने जीवन और अपने व्यवहार के आधार पर ही चलना चाहिए।"
ये भी पढ़ें : मुरैना में गरजे जीतू पटवारी, बोले- कृषि मंत्री की विधानसभा में ही ब्लैक हो रहा है खाद, ढाई साल बाद बदलाव तय
आशुतोष तिवारी के बयान से साफ संकेत मिलता है कि भाजपा फिलहाल दतिया उपचुनाव में हार के कारणों की समीक्षा और संगठनात्मक पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वहीं भीतरघात और नेताओं की भूमिका जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से कोई सीधा आरोप लगाने से बचते हुए पार्टी संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने का संदेश देने की कोशिश कर रही है।