

Ken Betwa Link Project Protest : छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के आंदोलन को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने इस मामले में प्रदेश सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आंदोलनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई और सरकार से जवाब मांगा है।
अरुण यादव ने लिखा कि छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोग उचित मुआवजे और अपने अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, लेकिन उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय जिला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें जबरन हटा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया गया।
गौरतलब है कि छतरपुर जिले में परियोजना प्रभावित परिवारों का ‘चिता आंदोलन’ रविवार को 17वें दिन में था। इस दौरान जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे थे। पुलिस ने आंदोलन स्थल पहुंचकर अमित भटनागर समेत कई आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया था। प्रशासन ने कार्रवाई के पीछे आंदोलनकारियों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और लगातार हो रही बारिश को कारण बताया था।
अमित भटनागर और कुछ अन्य आंदोलनकारियों को बिजावर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया, जबकि आंदोलनकारी इसे आंदोलन को कमजोर करने की कार्रवाई बता रहे हैं।
अरुण यादव ने अपने पोस्ट में सवाल किया कि आखिर सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों पर संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता क्यों अपना रही है। उन्होंने पूछा कि क्या लोकतंत्र में अपने अधिकारों और मांगों को लेकर आवाज उठाना अपराध बन गया है। उन्होंने प्रभावित परिवारों की मांगों को लेकर सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की। कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवार लंबे समय से मुआवजे, पुनर्वास और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रभावित लोगों के अधिकारों और समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानून व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। अब अरुण यादव के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस मामले को लेकर बयानबाजी बढ़ने की संभावना है।