राजा भोज ने 1034 में बनवाई थी भोजशाला! हिंदू पक्ष का बड़ा दावा, मामले में आया नया मोड़

Dhar Bhojshala Row: 'न मीनार, न वजूखाना, फिर मस्जिद कैसे?', हाई कोर्ट में हिंदू पक्ष ने 24 घंटे पूजा की मांग रखी है। सोमवार को मुस्लिम पक्ष देगा जवाब।
Dhar Bhojshala Case Indore High Court Hearing Hindu Side Arguments
भोजशाला विवाद में नया मोड़ (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bhojshala Case Update Indore High Court: धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही सुनवाई के दौरान शुक्रवार को मंदिर पक्ष ने अपना प्रतिउत्तर प्रस्तुत किया। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से दलील दी गई कि किसी भी मस्जिद में वजूखाना, मीनार और मेहराब जैसी संरचनाएं अनिवार्य मानी जाती हैं।

उनका कहना था कि भोजशाला परिसर में न तो वजूखाना मौजूद है और न ही मीनार। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार मेहराब भी बाद में निर्मित की गई थीं। इसी आधार पर पक्षकारों ने दावा किया कि भोजशाला को मस्जिद नहीं माना जा सकता।

1034 में राजा भोज ने किया था उज्जैन- हिंदू पक्ष

मस्जिद पक्ष की ओर से दलील दी गई कि पूजा स्थल अधिनियम के प्रावधानों के तहत उन्हें भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने का अधिकार प्राप्त है। वहीं मंदिर पक्ष ने तर्क रखा कि राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहरों पर यह कानून लागू नहीं होता। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित वाग्देवी की प्रतिमा से जुड़े स्वतंत्रता पूर्व पत्राचार में उल्लेख है कि भोजशाला का निर्माण वर्ष 1034 में राजा भोज ने कराया था। शुक्रवार को मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद को भी रिजॉइंडर प्रस्तुत करना था, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उन्हें सोमवार तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है।

विषणु शंकर जैन ने रखी यह दलील

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दलील दी कि मंदिर पक्ष इस मामले को सिविल विवाद बताकर उलझाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि याचिका संपत्ति के स्वामित्व निर्धारण के लिए नहीं, बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 7 अप्रैल 2023 के आदेश में संशोधन की मांग को लेकर दायर की गई है।

हिंदू पक्ष ने मांगी भोजशाला में 24 घंटे पूजा की अनुमति

बताया कि उक्त आदेश में मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई है, जबकि मंदिर पक्ष का दावा है कि भोजशाला एक मंदिर है और वहां 24 घंटे पूजा की अनुमति मिलनी चाहिए। वहीं मस्जिद पक्ष के 700 वर्षों से नमाज पढ़े जाने के दावे पर उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार यहां नमाज की शुरुआत वर्ष 1935 के आसपास हुए विवाद के बाद हुई थी।

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