बालाघाट में 29 बच्चों की मौत के बीच तुगलकी फरमान; वीडियोग्राफी बैन का आदेश 24 घंटे में लेना पड़ा वापस

Balaghat Videography Ban Order: में प्रशासन ने सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और स्कूलों में वीडियो/रील बनाने पर रोक का तुगलकी आदेश किया था जारी, विरोध के बाद 24 घंटे में ही निरस्त करना पड़ा प्रतिबंध।
Balaghat videography ban order withdrawn within 24 hours
पहले आदेश को निरस्त करने वाला दूसरा आदेश(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Videography Ban Order Withdrawn Balaghat: बालाघाट में बीते कुछ ही दिनों मे कथित अज्ञात रहस्यमयी कारणों से 29 बच्चों की मौत हो गई, जहां स्कूलों की हालत काफी खराब है, सरकारी दफ्तरों में लोग अपनी समस्याओं को लेकर खासे परेशान रहते हैं वहां पर यदि मीडिया इन समस्याओ को उठाए तो यह आसान नहीं है। जिला प्रशासन ने पहले एक आदेश जारी कर सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, अस्पतालों आदि में वीडियो बनाने, रील बनाने, लाइव स्ट्रीमिंग आदि पर रोक लगा दी और पुलिस को इस कथित सरकारी काम में बाधा पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

जब सोशल मीडिया में इस आदेश के खिलाफ लोगों का आक्रोश दिखाई देने लगा तो आनन फानन में दूसरे ही दिन आदेश को बिना कारण बताए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। कुछ दिनों पहले इसी तरह का एक आदेश डिडौरी जिले में भी जारी किया गया था। जिसकी तीखी प्रतिक्रिया प्रदेश स्तर पर देखी गई थी।

बिना अनुमति न करें रिकार्डिंग

बालाघाट जिले में जारी पहले आदेश में अस्पतालों, विद्यालयों और शासकीय कार्यालयों में बिना अनुमति फोटो, वीडियो और रील बनाने पर प्रतिबंध लगाया गया। अपर जिला दण्डाधिकारी डीपी बर्मन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया, जो 3 सितंबर से 3 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहना था। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के अंतर्गत वैधानिक कार्रवाई की बात भी कही गई थी।

निजता और व्यवस्था की सुरक्षा के लिए आदेश

आदेश के अनुसार मरीजों, विद्यार्थियों और शासकीय कार्यों की फोटो-वीडियो बिना अनुमति बनाना प्रतिबंधित रहेगा, ताकि निजता, सुरक्षा और कार्यप्रणाली प्रभावित न हो। अस्पतालों, विद्यालयों और कार्यालयों में भीड़ जुटाकर रील बनाने, कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और भ्रामक सूचना फैलाने पर भी रोक रहेगी। पत्रकारिता, जनसंपर्क और अधिकृत शासकीय कार्यों के लिए अनुमति मिलने पर ही फोटो-वीडियोग्राफी की जा सकेगी। सभी संस्थानों को परिसर में सूचना बोर्ड लगाने और पुलिस को उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

विरोध होता नजर आया तो बदल दिया आदेश

बालाघाट कलेक्ट्रेट से गुरुवार को एक आदेश जारी हुआ जिसमें सार्वजनिक संस्थानों, अस्पतालों और विद्यालयों में बिना अनुमति फोटो, वीडियो और रील बनाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन चंद घंटों बाद ही कलेक्ट्रेट कार्यालय ने दूसरा आदेश जारी कर पहले आदेश को निरस्त कर दिया। सूत्रों के अनुसार, आदेश जारी होने के बाद पत्रकारों, सोशल मीडिया क्रिएटर्स और जनसंपर्क विभागों से कई आपत्तियां सामने आईं। उनका कहना था कि यह आदेश सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है।

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अस्पतालों और विद्यालयों में अलग से प्रतिबंधात्मक आदेश जरूरी नहीं

साथ ही, कई विभागों ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों और विद्यालयों में पहले से ही निजता संबंधी दिशा-निर्देश लागू हैं, इसलिए अलग से प्रतिबंधात्मक आदेश की आवश्यकता नहीं थी।प्रशासनिक स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि आदेश की भाषा व्यापक थी, जिससे शासकीय प्रचार-प्रसार और वैध पत्रकारिता कार्य भी प्रभावित हो सकते थे। इसी कारण, स्थिति स्पष्ट करने और गलतफहमी से बचने के लिए आदेश को निरस्त कर दिया गया।

डिंडौरी में भी जारी हुआ था आदेश

कुछ महीनों पहले डिंडौरी जिले में भी इसी तरह का आदेश जारी किया गया था जिसका व्यापक विरोध प्रदेश स्तर तक देखा गया था जिसके बाद इसे निरस्त करने की नौबत आई थी। अब बालाघाट में पहले आदेश जारी होना और फिर निरस्त किया जाना सरकारी मशीनरी की नीयत पर सवाल खड़े करता है।

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