

Balaghat Unknown Disease: बालाघाट के आदिवासी अंचल अडोरी और मछुरदा पंचायत के ग्रामो में फैली महामारी ने एक और बच्ची की जान ले ली। सोमवार की रात, जिला अस्पताल में भर्ती प्रियंका पिता सुकचंद धुर्वे (3) की, ईलाज के दौरान मौत हो गई। 9 अगस्त को मासुम प्रियंका को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रियंका को कई बीमारियां थी। जिसे बचाने का प्रयास किया गया लेकिन उसकी मौत हो गई।
जबलपुर मेडिकल कॉलेज की टीम और बालाघाट के चिकित्सीय अमले ने, महामारी से प्रभावित बच्चो को देखा, लेकिन बीमार और मृत हुए बच्चों में वास्तविक बीमारी का पता अब तक नहीं चल सका है। चिकित्सक, बच्चो में निमोनिया, खून में कमी, शरीर का पानी सुख जाने, किडनी पर असर, सर्दी-खांसी, बुखार, एग्जिमा, खुजली और फंगस इंफेक्शन, मलेरिया जैसी बीमारी बता रहे है लेकिन बच्चों में मौत की कोई ठोस वजह, अब तक साफ नही हो सकी है, वहीं जांच के लिए पुणे भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट भी कब तक आएगी, इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग कोई जानकारी नहीं दे रहा है।
बता दें कि, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बाद दिग्विजय सिंह ने सीएम डॉ. मोहन यादव को भेजे गए पत्र में चिंता जाहिर करते हुए इसे गंभीर लापरवाही बताया है। दिग्विजय सिंह ने लिखा कि विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल बैगा आदिवासी परिवारो में संक्रमण की बीमारी कहकर बनकर टूटी है, जिससे परिवारो में मातम है। यह गंभीर लापरवाही का परिणाम है। यह घटना आदिवासियों की जिंदगी से मजाक है। विभागीय लापरवाही से जनित इस प्रकोप की राज्य स्तर से जांच कराई और दोषी अमले पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने पत्र में बताया कि यह गरीब आदिवासी परिवारों पर बड़ी विपदा है, जिसमें मृत बच्चो के परिवार को दस-दस लाख रूपए की रूपए की राहत राशि सीएम राहत कोष से दी जाए तथा गंभीर रूप से बीमारब च्चो को एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर और भोपाल में भर्ती कराकर, उनके सारे ईलाज का खर्च शासन उठाए।
ढाई महिने में आदिवाासी अंचल में मरने वाले बच्चो की संख्या 8 पहुंच हो गई है। आखिरी 8 वीं मौत, 11 अगस्त की रात बच्ची प्रियंका की जिला अस्पताल में मौत हो गई। जबकि इससे दिन में मंगली मरकाम की मौत गांव में हो गई थी। जबकि इससे पूर्व 26 जून से 22 जुलाई तक बोंदारी निवासी भाई बहन लमनिन पिता समारू धुर्वे (13), साहिल पिता समारू धुर्वे (1), पूजा पिता चमरू धुर्वे (एक साल 9 माह) सचिन पिता चैनसिंह मरकाम (5) और कुंडेकसा निवासी प्रिती पिता नेहरू मरकाम (4) और 6 अगस्त को अरविंद पिता चैतु धुर्वे (4) की मौत हुई थी।