23 अप्रैल को है चैत्र पूर्णिमा, सही मुहूर्त में करें पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त
इस बार 23 अप्रैल 2024 को चैत्र पूर्णिमा मनाई जाएगी जिसे चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है।
- Written By: दीपिका पाल
चैत्र पूर्णिमा 2024 (फाइल फोटो)
सीमा कुमारी
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: सनातन धर्म (Hindu Dharma) में पूर्णिमा तिथि बड़ा महत्व रखता है। इस वर्ष, चैत्र महीने की पूर्णिमा यानी चैत्र पूर्णिमा (Chaitra Purnima 2024) 23 अप्रैल 2024 को मनाई जाएगी। चैत्र पूर्णिमा, जिसे चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू नववर्ष का पहला महत्वपूर्ण त्यौहार है।
इस दिन ये तिथियां जाएगी मनाई
सम्बंधित ख़बरें
अमर हैं बजरंगबली, फिर ‘जयंती’ कैसी? इस बार जन्मोत्सव मनाने से पहले समझ लें इन दोनों शब्दों का फर्क
कहीं उल्टे तो कहीं लेटे हुए हैं भगवान हनुमान, जानें पवनपुत्र के 5 चमत्कारी और प्रसिद्ध धाम
आज चैत्र पूर्णिमा पर करें ये महाउपाय, धन की देवी मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न, आर्थिक तंगी से मिलेगा छुटकारा
हनुमान जयंती आज, भूलकर भी ना करें ये गलतियां, वरना रुष्ट हो जाएंगे बजरंगबली
आपको बता दें, चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती और महावीर जयंती भी मनाई जाती हैं। इस दिन चंद्र देव की चमक पूर्ण पर होती हैं। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-आराधना होती हैं। हिंदू धर्म में मान्यता है कि, इस व्रत को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती हैं। ऐसे में अगर आप भी चैत्र पूर्णिमा का इंतजार कर रहे हैं तो यहां आइए जानिए कब है पूर्णिमा, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि-
शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2024, प्रातः 3:25 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2024, प्रातः 5:18 बजे
स्नान मुहूर्त: 23 अप्रैल 2024, शाम 4:20 बजे से 5:04 बजे तक
पूजा विधि
चैत्र पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। इसके साथ ही इस दिन कनकधारा स्तोत्र और मंत्रों का जाप करना चाहिए। अंत में आरती करें और फल, खीर, मिठाई आदि चीजों का भोग लगाएं। लोगों में प्रसाद का वितरण करें। इसके बाद ब्राह्मण या गरीबों को श्रद्धा अनुसार दान अवश्य दें।
चैत्र पूर्णिमा का महत्व
चैत्र पूर्णिमा को हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य करने से पुण्य की वृद्धि होती है।
