आज Beat Leprosy थीम पर मनाया जा रहा है विश्व कुष्ठ रोग दिवस, 2027 तक रोग मुक्त बनाने का लक्ष्य
- Written By: दीपिका पाल
आज विश्व कुष्ठ रोग दिवस ( Google)
नवभारत डिजिटल टीम : जनवरी के अंतिम रविवार को विश्व कुष्ठ रोग (World Leprosy Day 2024) दिवस मनाया जाता है जो इस बार 30 जनवरी, मंगलवार के दिन मनेगा। जैसा कि जानते हैं कुष्ठ रोग को आज भी पिछड़े इलाकों में अभिशाप और कलंक के तौर पर मानते है। इतना ही नहीं इस रोग को लेकर लोग इस रोग के मरीजों को छूआछूत की संज्ञा तक दे देते है। इसे लेकर ही दुनियाभर में विश्व कुष्ठ रोग दिवस (रोग (World Leprosy Day 2024) ) मनाया जाता है। इस दिन भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (Mahatma Gandhi Death Annieversary) इस दिवस को मनाने के उद्धेश्य जागरूकता फैलाने के साथ रोग को जड़ के मिटाने की पहल है।
विश्व कुष्ठ रोग दिवस मनाने का उद्देश्य
विश्व कुष्ठ रोग दिवस इस जनवरी महीने के आखिरी दिन मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य खासतौर पर विश्वभर में कुष्ठ रोगों से प्रभावित लोगों के लिए कुछ जागरूकता फैलाना है। इसे लेकर दुनियाभर में कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के संगठनों और कुष्ठ रोग को लेकर काम करने वाले स्वास्थ्य व सामाजिक संगठनों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। इस दिवस को मनाने के लिए रोग के बेहतर इलाज की दिशा में प्रयासो के लिए शोध व अनुसंधानों को बढ़ावा देने व उनके लिए धन जुटाने के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
क्या है विश्व कुष्ठ रोग दिवस 2024 का थीम
यहां पर बात करें तो इस साल 2024 विश्व कुष्ठ रोग दिवस की थीम की Beat Leprosy है। यानि की इस बार दो उद्देश्यों के साथ कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक को मिटाना और रोग से प्रभावित लोगों की पहचान और गरिमा को बनाए रखना। इस विषय बीट लेप्रोसी को लेकर WHO ने बताया इस रोग को लेकर अभी फिलहाल में सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को जानना जरूरी है ताकि इस रोग को दूर करने के साथ लोगों के दिलो-दिमाग से कलंक शब्द हट जाएं। लोग कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों को सम्मान की नजर से देखें।
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छूने से नहीं फैलता है कुष्ठ रोग
इस कुष्ठ रोग लेकर WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते है कि यह रोग किसी के छूने से नहीं फैलता है। इसे हैनसेन रोग के नाम से जाना जाता है जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री के कारण होने वाला संक्रामक रोग है जिसमें त्वचा पर घाव के साथ तंत्रिकाओं से संबंधित समस्या, ऊपरी श्वसन पथ और आंखों पर सफेद चकते नजर आते है। यह रोग किसी भी वर्ग बच्चें से लेकर बुजुर्ग को हो सकता है।
इस बीमारी को लेकर निदान भी मौजूद है जो संक्रमण के लेवल को कम करके रोगी को दर्द ने निजात दिलाती है।
क्या 2027 तक जड़ से मिटेगा कुष्ठ रोग
यहां पर विश्व कुष्ठ रोग दिवस पर अब तक कुष्ठ रोग के आंकड़ों की बात की जाए तो साल 2020 तक ग्लोबल लेवल पर के लगभग 130,000 नए मामले सामने आए थे जिनमें से लगभग 73% भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया में थे। वहीं वर्ष 2021 में, वैश्विक स्तर पर कुष्ठ रोग के लगभग 1,40,546 नए मामले दर्ज किए गए थे।
इधर भारत की बात की जाए तो, यह रोग के मामले वर्तमान स्थिति में प्रति 10,000 लोगों पर 0.4 माना जा रहा है। इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत के कई राज्यों में फैलते प्रसार के बाद साल 2027 तक कुष्ठ रोग मुक्त दिवस बनाने का लक्ष्य रखा है।
