भगवान गणेश और शनिदेव (सौ.सोशल मीडिया)
जैसा कि, गणेश चतुर्थी के साथ ही 10 दिनों के गणेशोत्सव का दौर शुरु हो गया है वहीं पर घरों और पंडालों में भगवान गणेशजी की पूजा का विधान होता है। गणेश जी की पूजा विधि-विधान से करने का नियम होता है तो लोग इसका पालन भी भली भांति करते है। शनिवार से गणेश चतुर्थी की शुरुआत हो गई है जिसका अलग महत्व है। क्या आप जानते हैं भगवान श्रीगणेश और शनिदेव महाराज के बीच संबंध रहा है एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसमें इसका वर्णन किया गया है।
यहां पर पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती (Maa Parvati) ने भगवान गणेश को जन्म दिया तो शिवलोक में भगवान शंकर और माता गौरी के पुत्र गणेश के जन्म के उत्सव (Ganesh Utsav) का आयोजन किया गया. इस उत्सव में सभी देवी-देवता बालक गणेश को आशीर्वाद देने के लिए कैलाश पहुंचे थे। इस दौरान भगवान शनि भी इस उत्सव में शामिल हुए लेकिन बालक गणेश को आशीर्वाद दिए बिना ही सिर झुकाकर एक जगह खड़े हो गए। इस पर माता पार्वती को सोचने लगी शनिदेव बालक गणेश की ओर देख नहीं रहे है इसका कारण जानने के लिए उन्हे शनिदेव से बात की। इस पर शनि देव ने बताया कि उनकी दृष्टि बालक यानि गणेश जी को हानि पहुंच सकती है,इसलिए गणेश जी की ओर देखना शनि देव का उचित नहीं होगा। मां पार्वती शनि देव की वक्री दृष्टि के श्राप के बारे में नहीं जानती थी,तब शनि देव ने मां पार्वती को अपने श्राप के बारे में बताया।
इसके बाद माता पार्वती ने शनिदेव से कहा, आप बालक गणेश को देख सकते है कुछ अमंगल नहीं होगा। इस पर माता पार्वती नाराज ना हो जाए शनिदेव ने बालक गणेश को सीधी दृष्टि से देख लिया इस पर शनि देव की दृष्टि पड़ते ही बालक गणेश का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ गया। यह देख माता पार्वती बेहोश हो गईं, इस घटना के बाद माहौल बदल गया था जहां पर भगवान शिव और माता पार्वती परेशान हो गए थे। जिसके बाद भगवान गणेश जी को हाथी का सिर लगाया गया जिसके बाद से वे गजानन भी कहलाए। इस लिए शनिदेव की पूजा के दौरान सीधी दृष्टि से भगवान को देखना सही नहीं माना जाता।