दुनिया का सबसे डरावना चर्च जिसे देखने आते हैं लाखों लोग, अनोखी है इसकी रहस्यमयी कहानी

क्रिसमस का त्यौहार आने वाला है ऐसे में लोग चर्च जाना पसंद करते हैं। आमतौर पर आपने कई चर्चों के बारे में सुना होगा और देखा भी होगा। जिसे सजाने के लिए फूलों और अन्य सजावटी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है।
दुनिया का सबसे डरावने चर्च जिसे देखने आते हैं लाखों लोग, अनोखी है इसकी रहस्यमयी कहानी
दुनिया का सबसे डरावना चर्च (सौ. सोशल मीडिया)
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Scariest Church: क्रिसमस का त्यौहार आने वाला है ऐसे में लोग चर्च जाना पसंद करते हैं। आमतौर पर आपने कई चर्चों के बारे में सुना होगा और देखा भी होगा। जिसे सजाने के लिए फूलों और अन्य सजावटी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे चर्च के बारे में सुना है जो इंसान के कंकालों से सजाया गया है। इस चर्च को दुनिया का सबसे डरावना और रहस्यमयी चर्चा माना जाता है। लेकिन इसके बाद भी यहां पर लाखों लोग घूमने के लिए आते हैं। कंकालों से भरा चर्च देखकर किसी की भी रूह कांप जाएगी।

कहां पर स्थित है यह डरावना चर्च

जानकारी के अनुसार इस डरावने चर्च को एक या दो नहीं बल्कि 70 हजार कंकालों से सजाया गया है। जो देखने बहुत ही डरावना लगता है लेकिन फिर भी इसे देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ लगती है। अनुमान के अनुसार साल भर इस अनोखे चर्च को देखने के लिए करीब दो लाख से भी ज्यादा लोग आते हैं। इस अनोखे और डरावने चर्च का नाम सेडलेक ऑस्युअरी है। यह चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में स्थित है। इस चर्च की छत और झूमर सब कुछ इंसानी हड्डियों से सजाया गया है। जिस वजह से इसे चर्च ऑफ बोन्स के नाम से भी जाना जाता है।

क्या है इस चर्च की रहस्यमयी कहानी

कहा जाता है कि इस चर्च का निर्माण करीब 150 साल पहले किया गया था। इस चर्च को इंसानी कंकालों से सजाने के पीछे भी एक रहस्यमयी वजह है। कहते हैं कि साल 1278 में बोहेमिया के राजा ओट्टोकर द्वितीय ने हेनरी नाम के एक संत को यरुशलम भेजा था। बता दें कि यरुशलम को ईसा मसीह की कर्मभूमि कहा जाता है। यहां पर ही उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था। जब यरुशलम से संत वापस लौटे तो वह अपने साथ वहां की पवित्र मिट्टी से भरा हुआ एक जार भी लेकर आए।

जिसके बाद उस मिट्टी को एक कब्रिस्तान के ऊपर डाल दिया गया। उसी के बाद यह लोगों को दफनाने की पसंदीदा जगह बन गई। कब्रिस्तान की मिट्टी को लोग पवित्र मानते थे इस वजह से वह चाहते थे कि मरने के बाद उन्हें वहीं पर दफनाया जाए। इसी दौरान 14वीं सदी में ब्लैक डेथ महामारी फैल गई और भारी संख्या में लोग मारे गए। जिसके बाद उन्हें भी प्राग के उसी कब्रिस्तान में दफनाया गया था। कहा जाता है कि भारी मात्रा में लोगों को दफनाने की वजह से कब्रिस्तान में बिल्कुल जगह नहीं बची थी। इस वजह से वहां पर उनके कंकालों और हड्डियों को निकालकर चर्च में सजा दिया गया। इस वजह से यह चर्च पूरी दुनिया भर में फेमस हो गया।

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