भारत की इन पवित्र जगहों पर करें पूर्वजों का श्राद्ध, पुण्य और मोक्ष की होगी प्राप्ति

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष की शुरुआत इस साल 7 सितंबर से हो गई है। इस दौरान पितरों को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठानों से प्रसन्न किया जाता है। ऐसे में भारत की कुछ जगह बेस्ट हैं।
भारत की इन पवित्र जगहों पर करें पूर्वजों का श्राद्ध, पुण्य और मोक्ष की होगी प्राप्ति
पितृ पक्ष 2025 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Places for Pind Daan in India: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आर्शीवाद की प्राप्ति के लिए पूजा करते हैं। इस समय पूर्वजों को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के माध्यम से याद किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस काल में धर्म-कर्म, पिंडदान आदि करने से पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। अक्सर लोग पिंडदान के लिए गया जाते हैं क्योंकि इसे सबसे पवित्र तीर्थस्थल माना गया है।

इस बार हम आपकी कुछ ऐसी प्रसिद्ध और पवित्र जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आप पूर्वजों का श्राद्ध कर सकते हैं। इस जगहों पर पूर्वजों को श्रद्धांजलि देना बहुत अच्छा माना जाता है।

काशी

शिव की नगरी काशी में स्थित मणिकर्णिका घाट और पिशाच मोचन कुंड श्राद्ध और पिंडदान के लिए फेमस है। माना जाता है कि यहां पर पूर्वजों की आत्मा को शिवलोक की प्राप्ति होती है। इस जगह आप परिवार के साथ पितृ पक्ष पर आ सकते हैं।

हरिद्वार

गंगा नदी के तट पर बसे हरिद्वार को मोक्षदायिनी भी कहा जाता है। यहां पर लोग काफी तादाद में श्राद्ध दान करने आते हैं। माना जाता है कि नारायण शिला पर किए श्राद्ध से प्रेतयोनि में भटक रहे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

प्रयागराज

त्तर प्रदेश का प्रयागराज भी पितरों की आत्मा की शांति के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान है। यहां पर किए तर्पण से पितर जन्म जन्मांतर के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहीं पर भगवान राम ने पिता दशरथ का तर्पण किया था।

पुरी

चार धामों में पुरी भी एक है जहां पर भगवान जगन्नाथ का मंदिर है। यहां पितृ पक्ष के समय पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है। ओडिशा के पुरी में पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

गया

बिहार के गया में श्राद्ध करने से सात पीढ़ियों के पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। जिस वजह से इसे मुक्तिधाम कहा जाता है। यही वजह से पितृ पक्ष के दौरान यहां काफी भीड़ होती है। यहां पर विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी के किनारे पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण किया जाता है।

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