चिकनगुनिया बुखार का 'इन' लोगों को है सबसे ज़्यादा खतरा, जानिए इस खतरनाक बुखार के लक्षण

चिकनगुनिया बुखार का 'इन' लोगों को है सबसे ज़्यादा खतरा, जानिए इस खतरनाक बुखार के लक्षण
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सीमा कुमारी

नई दिल्ली: मानसून के साथ ही कई गंभीर बीमारियों का आगमन हो जाता है। समय रहते अगर सतर्क नहीं हुए तो डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। ये तीनों बीमारियां एक ही मच्छर के काटने से होती हैं। 'चिकनगुनिया' (Chikungunya) मच्छरों की वजह से फैलने वाली ऐसी बीमारी है। अफ्रीका और एशिया महाद्वीप के देशों में यह बीमारी बहुत अधिक पायी जाती है। हालांकि,मच्छरों की वजह से पनपने वाली इस बीमारी के कुछ मामले यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी पाए गए हैं। चिकनगुनिया शब्द, किमाकोंडे भाषा से उत्पन्न हुआ है जो तंजानिया के दक्षिण-पूर्वी इलाके और उत्तर मोजांबिक में बोली जाती है। आइए जानें चिकनगुनिया होने का खतरा किसे है और इसके 3 प्रमुख लक्षण क्या हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकनगुनिया एक वायरल बुखार है, जो सबसे ज्यादा नवजात शिशु, 65 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों और हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल के रोगों वाले मरीजों को अपना शिकार बनाता है। ऐसे लोगों को मानसून के मौसम में खास सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे जरूरी है कि आप मच्छरों के काटने से बचें और अपने आस-पास पानी जमा नहीं होने दें और सफाई रखें। इसके साथ ही पूरे कपड़े पहनें।

लक्षण

'चिकनगुनिया' वायरस से पीड़ित व्यक्ति को तेज बुखार आता है। ये बुखार 102 डिग्री फारेनहाइट या इससे ज्यादा रहता है। ऐसे में डॉक्टर के परामर्श के साथ दवाएं लें।

चिकनगुनिया में मरीज को बुखार के साथ सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और रैशेज पड़ना जैसी समस्याएं होती हैं। चिकनगुनिया का बुखार 3 से 7 दिन तक रहता है कुछ लोगों में ये 12 दिन तक रहता है। चिकनगुनिया के कुछ मरीजों को लंबे समय तक जोड़ों में दर्द रहने की वजह से गठिया (Arthritis) की बीमारी होने की संभावना रहती है।

ज्यादातर डॉक्टर्स इस बीमारी का पता लगाने के लिए पहले डेंगू और मलेरिया का टेस्ट करते हैं। फिर, चिकनगुनिया का टेस्ट किया जाता है। इस मच्छर जनित बीमारी का पता लगाने के लिए एक साधारण सा ब्लड टेस्ट (CHIKV) किया जाता है।

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