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बिहार के इस जगह सीता मैया ने की थी ‘छठ पूजा’, जानिए कैसे आरंभ हुआ छठ पर्व

  • Written By: नवभारत डेस्क
Updated On: Oct 29, 2022 | 06:45 AM

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-सीमा कुमारी

सूर्योपासना का महापर्व ‘छठ’ हिन्दू धर्म में विशेष रखता हैं। इस बार यह पर्व शुक्रवार, 28 अक्टूबर से शुरु हो चुका है। ‘छठ’ बिहार का प्रमुख पर्व हैं। यह पर्व बिहार के साथ देश के अन्य राज्यों में भी बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ का मुंगेर में विशेष महत्व है। इस पर्व को लेकर यहां चार लोककथाएं प्रचलित हैं। उनमें से एक कथा के अनुसार सीता माता ने यहां छठ व्रत कर इस पर्व की शुरुआत की थी।

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आनंद रामायण के अनुसार, मुंगेर जिले के बबुआ घाट से दो किलोमीटर दूर गंगा के बीच स्थित पर्वत पर ऋषि मुद्गल के आश्रम में मां सीता ने छठ किया था। माता सीता ने जहां पर छठ किया था वह स्थान वर्तमान में सीता चारण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। तब से अंग व मिथिला सहित पूरे देश मे छठ व्रत मनाया जाने लगा।

सीता चरण पर कई वर्षों से शोध कर रहे शहर के प्रसिद्ध प्रोफेसर सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि आनंद रामायण के पृष्ठ संख्या 33 से 36 तक सीता चरण और मुंगेर के बारे में उल्लेख किया गया है। आनंद रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने ब्राह्मण रावण का वध किया था, इसलिए राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा था। पापमुक्ति के लिए आयोध्या के कुलगुरु मुनि वशिष्ठ ने तत्कालीन मुद्गल (मुंगेर का तात्कालीन नाम) में मुद्गल ऋषि के पास भगवान राम व सीता माता को भेजा।

भगवान राम को ऋषि मुद्गल ने वर्तमान कष्टहरणी घाट में ब्रह्महत्या मुक्ति यज्ञ कराया और माता सीता को अपने आश्रम में ही रहने के आदेश दिए। चूंकि महिलाएं यज्ञ में भाग नहीं ले सकती थीं, इसलिए माता सीता ने ऋषि मुद्गल के आश्रम में रहकर ही उनके निर्देश पर सूर्योपासना का पांच दिन तक चलने वाला छठ व्रत किया था।

सूर्य उपासना के दौरान मां सीता ने अस्ताचलगामी सूर्य को पश्चिम दिशा की ओर तथा उदयाचलगामी सूर्य को पूरब दिशा की ओर अर्घ्य दिया था। आज भी मंदिर के गर्भगृह में पश्चिम और पूरब दिशा की ओर माता सीता के चरणों के निशान मौजूद  हैं। शिलापट्ट पर सूप, डाला और लोटा के निशान हैं।

मंदिर का गर्भगृह साल में छह  महीने तक गंगा के गर्भ में समाया रहता है तथा गंगा का जलस्तर घटने पर छह महीने ऊपर रहता है। मंदिर के राम बाबा ने कहा कि पहले शिलापट्ट पर बने निशान की लोग यहां आकर पूजा-पाठ करते थे। 1972 में सीता चरण में संतों का सम्मेलन हुआ था। उसी समय लोगों के आग्रह पर सीताचारण मंदिर बनाने का फैसला लिया गया था। यह मंदिर 1974 में बनकर तैयार हुआ था। मंदिर के प्रांगण में छठ करने से लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है।

Sita maiya did chhath puja at this place of bihar know how chhath festival started

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Published On: Oct 29, 2022 | 06:45 AM

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