

सीमा कुमारी
नवभारत डिजिटल टीम: हिंदू धर्म में अखंड सौभाग्य का प्रतीक 'करवा चौथ'(Karwa Chauth 2023) व्रत का बड़ा महत्व है। इस बार यह व्रत 1 नवंबर, बुधवार को रखा जाएगा। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, इस दिन विवाहित महिलाएं पति की उन्नति और लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। सारा दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को चंद्रमा के दर्शन करके व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ की शुभता बढ़ाने के लिए और चंद्र देवता का आशीर्वाद पाने के लिए वास्तु शास्त्र में करवा चौथ के कुछ नियम बताए गए हैं। इन वास्तु नियमों का पालन करने से व्यक्ति को अखंड सौभाग्य मिलता है और खुशहाली बनी रहती है। तो ऐसे में आइए जानें इन वास्तु नियमों के बारे में-
ज्योतिषियों के अनुसार, यदि आप करवा चौथ में छलनी से चांद के दर्शन करती हैं तो आपको हमेशा ऐसी छलनी चुननी चाहिए जो कहीं से टूटी-फूटी न हो। यदि संभव हो तो चांदी की छलनी का इस्तेमाल करें। हालांकि सबके लिए ऐसा संभव नहीं होता है कि वो चांदी की छलनी ही चुने, लेकिन आपको प्लास्टिक की छलनी का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
कहते है चंद्रमा को अर्घ्य देते हुए आपका मुंह उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इसके अलावा, अर्घ्य देते हुए इस बात का ध्यान रखें कि जल में कुछ दूध की बूंदें जरूर डालें। इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
चंद्रमा की पूजा करने से पहले आप उस स्थान को अच्छी तरह से साफ़ करें। किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए पूजा के स्थान को नमक के पानी से साफ़ करने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि आप जिस स्थान पर भी पूजा करने जा रहे हैं, वहां किसी भी तरह का कूड़ा और कचरा इकठ्ठा नहीं होना चाहिए।
चंद्रमा की पूजा करते हुए आप पूर्व दिशा की ओर देखते हुए चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें। मान्यताओं के अनुसार, मंत्रों की ध्वनि से पॉजिटिव एनर्जी निकलती है जिससे वातावरण भी शांत बनता है।
यदि आप करवा चौथ के दौरान चांद की पूजा करती हैं तो आपको ध्यान देना चाहिए कि आप पूजा के स्थान पर ही जल से भरा एक बर्तन रखें और इसी बर्तन में रखे जल से चांद को अर्घ्य दें। पानी पवित्रता का प्रतीक माना जाता है और यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। इसी वजह से पूजा के समय जल का इस्तेमाल करना जरूरी होता है।